होम › पूजा विधि › सूर्य अर्घ्य और पूजा विधि
☀️

सूर्य अर्घ्य और पूजा विधि (Surya Arghya Puja Vidhi)

सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि: समय, दिशा, जल का पात्र, मंत्र, रविवार की पूजा और आँखों की सुरक्षा के नियम।

⏱ लगभग 10–15 मिनट 🧺 6 सामग्री 🪔 5 चरण

कब करें

  • प्रतिदिन सूर्योदय के समय
  • रविवार
  • छठ, मकर संक्रांति, रथ सप्तमी

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धता

सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

2

जल तैयार करें

तांबे के लोटे में जल, थोड़ा लाल चंदन, फूल और अक्षत डालें।

3

पूर्व की ओर खड़े हों

सूर्य की ओर मुख करके खड़े हों। जल की धार धीरे-धीरे नीचे गिराएँ और उस धार के बीच से सूर्य की कोमल किरणों के दर्शन करें।

ॐ सूर्याय नमः॥
4

मंत्र जप

अर्घ्य देते समय या बाद में सूर्य मंत्र का जप करें।

ॐ घृणिः सूर्य आदित्यः॥
5

प्रणाम और परिक्रमा

हाथ जोड़कर प्रणाम करें और अपने स्थान पर तीन बार घूमकर परिक्रमा करें।

मंत्र

सूर्य मंत्र
ॐ सूर्याय नमः॥
आदित्य
ॐ घृणिः सूर्य आदित्यः॥
गायत्री
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

✔ क्या करें

  • सुबह के कोमल सूर्य के समय अर्घ्य दें
  • जल पैरों में न आए, इसके लिए पात्र या मिट्टी में अर्घ्य गिराएँ
  • रविवार को सात्त्विक भोजन करें

✘ क्या न करें

  • दोपहर के तेज़ सूर्य को सीधे आँखों से न देखें
  • अर्घ्य का जल पैरों से न छुएँ
  • जूते पहनकर पूजा न करें

आम गलतियाँ

  • सूर्य को सीधे देर तक देखना; यह आँखों के लिए हानिकारक है
  • देर से उठकर तेज़ धूप में अर्घ्य देना

शुभ मुहूर्त

अपने शहर के सूर्योदय का समय पंचांग में देखें। उसके तुरंत बाद का समय अर्घ्य के लिए उपयुक्त है।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्घ्य किस समय देना चाहिए?
सूर्योदय के समय या उसके तुरंत बाद, जब धूप कोमल हो।
अर्घ्य किस पात्र से दें?
परंपरा में तांबे का लोटा श्रेष्ठ माना जाता है।
क्या सूर्य को देखना सुरक्षित है?
केवल उगते समय की कोमल किरणें। तेज़ धूप में सीधे न देखें।
रविवार को क्या करें?
सूर्य उपासना, सात्त्विक भोजन और गुड़-गेहूँ का दान, श्रद्धा अनुसार।
सूर्य अर्घ्य के लाभ क्या हैं?
परंपरा में स्वास्थ्य और तेज की कामना जुड़ी है। सुबह उठने का अनुशासन भी बनता है।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।