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पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)
भाग १: प्रियव्रत और मालिनी
एक कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी की कोई संतान न थी। महर्षि कश्यप ने यज्ञ कराया और खीर का प्रसाद दिया। रानी ने प्रसाद खाया और पुत्र हुआ, पर वह मृत जन्मा।
भाग २: देवी षष्ठी
राजा शोकाकुल होकर पुत्र का शव लेकर श्मशान गए। तभी देवी षष्ठी प्रकट हुईं, जिन्हें ब्रह्मा की मानसपुत्री कहा गया है। उन्होंने बालक को जीवित कर दिया और कहा कि जो भक्त मेरी पूजा करेंगे, उनकी संतान की रक्षा होगी।
भाग ३: व्रत की परंपरा
राजा ने नगर में षष्ठी पूजा की घोषणा करवाई। तभी से कार्तिक शुक्ल षष्ठी को छठ पूजा की परंपरा चली। लोककथाओं में सीता और द्रौपदी द्वारा भी सूर्य उपासना का उल्लेख मिलता है।
इति छठ पूजा कथा संपूर्ण
एक नज़र में
• देवता: सूर्य देव और छठी मैया
• कब: कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी (चार दिन), मुख्य दिन षष्ठी
• उपवास: निर्जला, लगभग 36 घंटे (मुख्य व्रत)
• विशेष: अस्ताचल और उदयाचल सूर्य को अर्घ्य
• मुख्य सीख: अनुशासन, शुद्धता और प्रकृति के प्रति आभार
परिचय और महत्व
छठ बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र का प्रमुख पर्व है। इसमें सूर्य देव और छठी मैया की पूजा नदी या तालाब के किनारे की जाती है।
इस व्रत में नियमों की कठोरता और शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसमें किसी पुरोहित की आवश्यकता नहीं मानी जाती; व्रती स्वयं पूजा करता है।
कब किया जाता है
• कार्तिक शुक्ल चतुर्थी (नहाय-खाय) से सप्तमी (उषा अर्घ्य) तक।
• पहला दिन: नहाय-खाय। दूसरा दिन: खरना। तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य। चौथा दिन: उषा अर्घ्य और पारण।
• तिथियाँ पंचांग और स्थानीय घाट व्यवस्था के अनुसार देखें।
पूजा सामग्री
• बाँस की सूप और दउरा (टोकरी)
• ठेकुआ, चावल के लड्डू, मौसमी फल (केला, नारियल, गन्ना, सिंघाड़ा, नींबू)
• मिट्टी का दीपक, धूप, रोली, अक्षत
• लोटा और दूध-जल अर्घ्य के लिए
• साफ़ कपड़े और नए वस्त्र
व्रत विधि
1. नहाय-खाय: स्नान कर शुद्ध भोजन (कद्दू-भात आदि) करें।
2. खरना: दिन भर निराहार रहकर संध्या में गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद लें, फिर निर्जला व्रत आरंभ करें।
3. संध्या अर्घ्य: जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को सूप में फल-प्रसाद के साथ अर्घ्य दें।
4. रात में छठी मैया के गीत गाएँ और जागरण करें।
5. उषा अर्घ्य: उगते सूर्य को अर्घ्य दें।
6. पारण: प्रसाद लेकर व्रत खोलें और सबको बाँटें।
क्या करें
• शुद्धता और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें।
• घाट पर अनुशासन और सुरक्षा का पालन करें।
• प्रसाद सबमें बाँटें।
• गहरे पानी में सावधानी रखें।
क्या न करें
• लहसुन-प्याज़ और तामसिक भोजन से दूर रहें।
• प्रसाद बनाने में जूठन या अशुद्धता न करें।
• शोर-शराबे और कचरे से घाट को गंदा न करें।
फल (मान्यता)
मान्यता है कि छठ का व्रत संतान सुख, आरोग्य और परिवार की समृद्धि के लिए किया जाता है। इसे अत्यंत कठोर तप माना जाता है।
मंत्र और आरती
• मंत्र: "ॐ घृणि सूर्याय नमः", "ॐ सूर्याय नमः"
• छठी मैया के लोकगीत: क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार
• सूर्य देव की आरती: https://divyavani.app/aarti
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: छठ पूजा कब होती है?
उत्तर: दीपावली के छह दिन बाद, कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मुख्य अर्घ्य होता है। पूरा पर्व चार दिन का है।
प्रश्न: खरना क्या है?
उत्तर: छठ का दूसरा दिन, जिसमें व्रती दिन भर निराहार रहकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करता है। इसके बाद निर्जला व्रत शुरू होता है।
प्रश्न: छठी मैया कौन हैं?
उत्तर: लोक परंपरा में वे बच्चों की रक्षक देवी हैं और सूर्य देव की बहन भी मानी जाती हैं। कुछ पुराणों में उन्हें देवी षष्ठी कहा गया है।
प्रश्न: छठ में क्या सावधानी रखें?
उत्तर: निर्जला उपवास में अपनी सेहत देखें, बुज़ुर्ग और बीमार डॉक्टर से सलाह लें। नदी-तालाब में गहरे जाने से बचें और भीड़ में सावधानी रखें।
प्रश्न: क्या कोई भी छठ कर सकता है?
उत्तर: परंपरा में स्त्री-पुरुष दोनों व्रत रखते हैं। नियम और शुद्धता का पालन आवश्यक माना जाता है।
सावधानी
निर्जला उपवास कठिन है। स्वास्थ्य समस्या हो तो डॉक्टर की सलाह लें। यह कथा पारंपरिक कथा का पुनर्कथन है। क्षेत्र के अनुसार विधि और कथा में अंतर मिलता है।