अविनाशी आत्मा

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गुरूवार, 15 अक्टूबर 2026

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥

इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती, जल भिगो नहीं सकता और वायु सुखा नहीं सकती।

Weapons cannot cut the soul, fire cannot burn it, water cannot wet it, and wind cannot dry it.

📖 Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता) 2.23

पिछले दिनों के श्लोक

बुध, 14 अक्टू.
आत्मा और शरीर
वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-न्यन्यानि सं...
मंगल, 13 अक्टू.
कर्मयोग
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥