अक्षय तृतीया पूजा विधि (Akshaya Tritiya Puja Vidhi)
अक्षय तृतीया की पूजा: लक्ष्मी-विष्णु पूजन, दान, जौ-सत्तू, परंपराएँ, खरीदारी की मान्यता और नए कार्य की शुरुआत।
कब करें
- वैशाख शुक्ल तृतीया को
- पूजा सुबह या दिन में, पूरे दिन को शुभ माना जाता है
पूजा सामग्री चेकलिस्ट
पूजा विधि (चरणबद्ध)
स्नान और शुद्धि
स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।
स्थान तैयार करें
पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
दीप और आचमन
दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।
संकल्प
हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।
गणेश वंदना
किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।
विष्णु-लक्ष्मी की स्थापना
चौकी पर लक्ष्मी-विष्णु का चित्र स्थापित करें।
पूजन
चंदन, अक्षत, तुलसी और फूल अर्पित करें। जौ और अक्षत का विशेष महत्व माना जाता है।
भोग
सत्तू, गुड़, मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएँ।
दान
ठंडा जल, पंखा, छाता, चप्पल, अन्न या वस्त्र का दान करें।
आरती
घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।
क्षमा प्रार्थना
पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।
प्रसाद और समापन
प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।
मंत्र
✔ क्या करें
- पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
- शांत मन और श्रद्धा से बैठें
- भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
- पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
- दान अपनी सामर्थ्य अनुसार करें
- नया कार्य शुरू करने से पहले पूजा करें
✘ क्या न करें
- पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
- क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
- बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
- मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
- कर्ज़ लेकर खरीदारी या सोना न खरीदें
- दिखावा न करें
आम गलतियाँ
- इस दिन केवल सोना खरीदने को ही पूजा समझना; दान और सेवा भी इसका भाग हैं
- तिथि की गलत जानकारी; पंचांग देखें
शुभ मुहूर्त
अक्षय तृतीया की तिथि का आरंभ और समाप्ति पंचांग में देखें। परंपरा में पूरे दिन को अबूझ मुहूर्त जैसा शुभ माना जाता है।
संबंधित आरती, कथा और मंत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अक्षय तृतीया का अर्थ क्या है?
क्या सोना खरीदना ज़रूरी है?
अक्षय तृतीया पर क्या दान करें?
अक्षय तृतीया पर कौन से शुभ कार्य होते हैं?
अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती?
अन्य पूजा विधियाँ
नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।