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करवा चौथ पूजा विधि (Karwa Chauth Puja Vidhi)

करवा चौथ की पूजा विधि: सरगी, निर्जला व्रत, संध्या पूजन, कथा, चंद्र दर्शन और अर्घ्य के बाद व्रत खोलने का क्रम, सामग्री सहित।

⏱ पूजा: लगभग 45 मिनट; व्रत: सूर्योदय से चंद्रोदय तक 🧺 8 सामग्री 🪔 14 चरण

कब करें

  • कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को
  • सूर्योदय से पहले सरगी, संध्या में पूजा, चंद्रोदय पर अर्घ्य

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

सरगी (सूर्योदय से पहले)

सास या बड़ों से मिली सरगी सूर्योदय से पहले ग्रहण करें और व्रत का संकल्प लें। कुछ परिवारों में सरगी की परंपरा नहीं होती।

7

दिन भर व्रत

दिन में निर्जला या अपनी परंपरा अनुसार व्रत रखें। सेहत ठीक न हो तो जल या फलाहार की सलाह डॉक्टर से लें।

8

संध्या पूजन

संध्या में सजकर चौकी पर शिव-पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और करवा स्थापित करें। रोली, अक्षत और फूल से पूजन करें।

ॐ नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतितिं शुभाम्। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥
9

कथा और करवा बदलना

करवा चौथ की कथा सुनें। सखियों के साथ करवा आपस में बदलने (फेरे) की परंपरा है।

10

चंद्र दर्शन और अर्घ्य

चंद्रोदय पर छलनी से चंद्रमा को और फिर पति को देखें। चंद्रमा को जल का अर्घ्य दें और आरती करें।

11

व्रत खोलना

पति के हाथ से जल पीकर और मिठाई खाकर व्रत खोलें। फिर बड़ों के चरण स्पर्श करें और भोजन करें।

12

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

13

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
14

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

शिव-पार्वती
ॐ नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतितिं शुभाम्। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥
चंद्र मंत्र
ॐ सोमाय नमः॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • सुहाग सामग्री से सजें
  • बड़ों का आशीर्वाद लें

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • सुई-धागे और नुकीले औज़ार से परहेज़ की परंपरा कई घरों में है
  • किसी पर क्रोध न करें

आम गलतियाँ

  • सेहत की अनदेखी करके कठोर व्रत रखना; गर्भवती, बीमार और बुज़ुर्ग डॉक्टर से सलाह लें
  • चंद्रमा के निकलने का समय गलत देखना; अपने शहर का समय पंचांग से देखें
  • व्रत को केवल दिखावे तक सीमित रखना

शुभ मुहूर्त

पूजा का मुहूर्त और चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है। अपने शहर का पंचांग देखें।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

करवा चौथ का व्रत कब खोलते हैं?
चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर, आमतौर पर पति के हाथ से जल पीकर।
क्या बिना पानी के व्रत ज़रूरी है?
परंपरा में निर्जला रखा जाता है, पर सेहत सर्वोपरि है। डॉक्टर की सलाह से जल या फलाहार लिया जा सकता है।
सरगी क्या होती है?
सास द्वारा सूर्योदय से पहले दिया जाने वाला भोजन और उपहार, जिसमें फल, मिठाई, सूखे मेवे आदि होते हैं।
अगर चंद्रमा न दिखे तो?
पंचांग में दिए चंद्रोदय के समय पर परिवार की परंपरा अनुसार अर्घ्य दें। बादल हों तो बड़ों से पूछ लें।
क्या अविवाहित कन्या यह व्रत रख सकती है?
कई जगह मनचाहे वर की कामना से कन्याएँ भी रखती हैं। यह पारिवारिक परंपरा पर निर्भर है।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।