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लक्ष्मी पूजा विधि (Lakshmi Puja Vidhi)

माँ लक्ष्मी की पूजा विधि: दीपावली और शुक्रवार की पूजा, सामग्री, स्थापना, मंत्र, श्रीसूक्त और आरती।

⏱ लगभग 45–60 मिनट 🧺 16 सामग्री 🪔 14 चरण

कब करें

  • दीपावली की संध्या में लक्ष्मी-गणेश पूजन
  • प्रत्येक शुक्रवार
  • धनतेरस, शरद पूर्णिमा और अक्षय तृतीया

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

लक्ष्मी-गणेश स्थापना

चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी को लक्ष्मी जी की बाईं ओर स्थापित करें। पास में कलश रखें।

7

लक्ष्मी जी का आवाहन

हाथ जोड़कर माँ लक्ष्मी का आवाहन करें और आसन अर्पित करें।

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
8

स्नान, श्रृंगार, तिलक

जल के छींटे देकर प्रतीकात्मक स्नान कराएँ। रोली-चंदन का तिलक करें, वस्त्र या कलावा अर्पित करें।

9

कमल, खील-बताशे और सिक्के

कमल या गुलाब, खील-बताशे और सिक्के अर्पित करें।

10

श्रीसूक्त या मंत्र जप

श्रीसूक्त का पाठ करें या लक्ष्मी मंत्र का 108 बार जप करें।

ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
11

भोग

मिठाई, खीर और फल का भोग लगाएँ।

12

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

13

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
14

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

लक्ष्मी बीज मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
महालक्ष्मी
ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
गणेश वंदना
वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • घर, तिजोरी और पूजा स्थान स्वच्छ रखें
  • पूजा के बाद ज़रूरतमंद को कुछ दान करें

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • जुआ आदि को पर्व का हिस्सा न बनाएँ
  • पटाखों से पशुओं, बुज़ुर्गों और पर्यावरण को कष्ट न दें

आम गलतियाँ

  • पूजा केवल धन की कामना तक सीमित रखना; परंपरा में लक्ष्मी स्वच्छता, परिश्रम और सद्भाव से जुड़ी हैं
  • लक्ष्मी जी की प्रतिमा अकेले स्थापित करना; गणेश जी के साथ पूजन परंपरा है
  • दीपक और स्वच्छता में लापरवाही

शुभ मुहूर्त

दीपावली पर प्रदोष काल और स्थिर लग्न में पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है। शुक्रवार की पूजा संध्या में कर सकते हैं। सही समय के लिए पंचांग देखें।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा क्यों होती है?
गणेश जी विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता हैं। परंपरा में धन के साथ विवेक भी आवश्यक माना गया है।
लक्ष्मी पूजा में कौन सा फूल चढ़ाएँ?
कमल सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। न मिले तो गुलाब या गेंदा।
लक्ष्मी जी का प्रिय भोग क्या है?
खीर, मिठाई, खील-बताशे और नारियल।
क्या शुक्रवार को रोज़ लक्ष्मी पूजा करनी चाहिए?
श्रद्धा हो तो साप्ताहिक शुक्रवार पूजा कर सकते हैं। यह अनिवार्य नहीं।
लक्ष्मी पूजा किस दिशा में करें?
उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में मुख करके पूजा करना शुभ माना जाता है।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।