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हनुमान पूजा विधि (Hanuman Puja Vidhi)

हनुमान जी की पूजा विधि: मंगलवार-शनिवार की पूजा, सामग्री, सिंदूर-चोला, हनुमान चालीसा पाठ और नियम।

⏱ लगभग 30–40 मिनट 🧺 15 सामग्री 🪔 11 चरण

कब करें

  • मंगलवार और शनिवार
  • हनुमान जयंती
  • संकट के समय में स्मरण

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

हनुमान जी का पूजन

हनुमान जी की प्रतिमा को जल से स्नान कराकर सिंदूर और तेल का तिलक लगाएँ।

ॐ हं हनुमते नमः॥
7

पुष्प और भोग

लाल फूल अर्पित करें। बूंदी के लड्डू या गुड़-चने का भोग लगाएँ।

8

हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा का पाठ करें। श्रद्धा से 1, 3, 7 या 11 बार पढ़ने की परंपरा है।

9

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

10

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
11

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

हनुमान बीज
ॐ हं हनुमते नमः॥
हनुमान गायत्री
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • बजरंग बली को सिंदूर चढ़ाएँ

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • तामसिक भोजन और अनुचित आचरण से बचें

आम गलतियाँ

  • चालीसा को बिना भाव के बहुत जल्दी पढ़ना
  • डर के भाव से पूजा करना; हनुमान जी साहस और सेवा के प्रतीक हैं

शुभ मुहूर्त

मंगलवार और शनिवार को सुबह या संध्या में पूजा की जा सकती है। हनुमान जयंती का समय पंचांग से देखें।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हनुमान जी को क्या चढ़ाना चाहिए?
सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, बूंदी के लड्डू, गुड़-चना और तुलसी दल।
क्या महिलाएँ हनुमान जी की पूजा कर सकती हैं?
हाँ, श्रद्धा से कर सकती हैं। मूर्ति स्पर्श को लेकर परिवार की रीति का पालन करें।
हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ें?
संख्या का कोई कठोर नियम नहीं; 1, 3, 7, 11 बार की परंपरा है।
मंगलवार को क्या खाएँ?
सात्त्विक भोजन। कई लोग व्रत में गुड़-चने या फल खाते हैं।
सिंदूर का चोला कब चढ़ाएँ?
मंगलवार या शनिवार, श्रद्धा अनुसार।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।