होम › पूजा विधि › गृह प्रवेश पूजा विधि
🏡

गृह प्रवेश पूजा विधि (Griha Pravesh Puja Vidhi)

नए घर में गृह प्रवेश की पूजा: मुहूर्त का महत्व, सामग्री, कलश, वास्तु पूजा, हवन, पहला भोजन और ज़रूरी बातें।

⏱ लगभग 2–3 घंटे (पंडित सहित) 🧺 8 सामग्री 🪔 14 चरण

कब करें

  • नए घर में पहली बार प्रवेश करने से पहले
  • शुभ मुहूर्त में, पंडित जी की सलाह से

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

मुख्य द्वार पर तोरण

द्वार पर आम के पत्ते का तोरण, स्वास्तिक और रंगोली बनाएँ।

7

कलश और पहले कदम

परिवार की स्त्री दाहिना पैर आगे रखकर कलश के साथ घर में प्रवेश करे, बड़ों के आशीर्वाद से।

8

वास्तु और गणेश पूजन

गणेश जी और वास्तु देवता का पूजन करें।

ॐ वास्तोष्पतये नमः॥
9

हवन

हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित कर पंडित जी के साथ आहुतियाँ दें।

10

दूध उबालना

रसोई में दूध उबालकर बहने देने की परंपरा है, यह समृद्धि का प्रतीक है।

11

भोज

परिवार और स्नेहीजनों को भोजन कराएँ।

12

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

13

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
14

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

गणेश
ॐ गं गणपतये नमः॥
वास्तु
ॐ वास्तोष्पतये नमः॥
गायत्री
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • पंडित से मुहूर्त पूछें
  • घर में पहले सकारात्मक वातावरण बनाएँ

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • निर्माण अधूरा छोड़कर शुभ पूजा न करें
  • घर में अनावश्यक विवाद न करें

आम गलतियाँ

  • मुहूर्त जाने बिना प्रवेश करना
  • पूजा सामग्री अधूरी होना
  • नियमों को लेकर परिवार में मतभेद; सरल, सर्वसम्मत विधि अपनाएँ

शुभ मुहूर्त

गृह प्रवेश का मुहूर्त तिथि, नक्षत्र और लग्न देखकर पंडित जी या ज्योतिषी तय करते हैं। इसे अपने शहर के पंचांग से मिलाकर किसी जानकार से पूछ लें।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गृह प्रवेश कितने प्रकार का होता है?
परंपरा में अपूर्व (पहली बार), सपूर्व (वापसी) और द्वंद्व (आपदा के बाद) जैसे प्रकार बताए जाते हैं।
क्या सत्यनारायण पूजा गृह प्रवेश में ज़रूरी है?
अनिवार्य नहीं। कई परिवार उसी दिन या अगले दिन सत्यनारायण कथा कराते हैं।
गृह प्रवेश में दूध उबालना क्यों?
यह समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है।
क्या किराये के घर में भी पूजा करें?
हाँ, छोटी पूजा, गणेश वंदना और दीप-आरती करके प्रवेश करें।
गृह प्रवेश का समय कौन तय करे?
अपने कुल पंडित या ज्योतिषी, पंचांग के आधार पर।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।