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प्रदोष व्रत पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)

प्रदोष व्रत की संध्या पूजा विधि: प्रदोष काल, शिव अभिषेक, बेलपत्र, कथा, मंत्र और व्रत के नियम।

⏱ लगभग 45 मिनट 🧺 6 सामग्री 🪔 14 चरण

कब करें

  • प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी को
  • पूजा प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास) में

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

दिन का व्रत

दिन में फलाहार या निराहार रहकर शिव का स्मरण करें।

7

संध्या में स्नान और तैयारी

सूर्यास्त से कुछ पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें।

8

शिव अभिषेक

शिवलिंग पर जल, दूध आदि से अभिषेक करें।

ॐ नमः शिवाय॥
9

बेलपत्र और धतूरा

बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें।

10

कथा और आरती

प्रदोष व्रत कथा सुनें और शिव आरती करें।

11

पारण

पूजा के बाद फलाहार करें या सात्त्विक भोजन से व्रत पूरा करें।

12

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

13

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
14

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

पंचाक्षर
ॐ नमः शिवाय॥
महामृत्युंजय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • संध्या का समय शिव पूजा के लिए रखें

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • तुलसी न चढ़ाएँ (परंपरा)
  • दिन में सोने से बचें

आम गलतियाँ

  • प्रदोष काल का समय गलत लेना; पंचांग देखें
  • पूजा जल्दबाज़ी में निपटा देना

शुभ मुहूर्त

प्रदोष काल सूर्यास्त के आसपास लगभग 1.5 घंटे का माना जाता है। अपने शहर का समय पंचांग में देखें। सोम प्रदोष और शनि प्रदोष विशेष माने जाते हैं।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रदोष काल कब होता है?
त्रयोदशी तिथि पर सूर्यास्त के आसपास, लगभग 1.5 घंटे का समय।
सोम प्रदोष क्या है?
जब प्रदोष सोमवार को पड़े। इसे शिव पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
प्रदोष व्रत में क्या खाएँ?
दिन में फलाहार; शाम की पूजा के बाद सात्त्विक भोजन।
क्या प्रदोष का व्रत महिलाएँ भी रख सकती हैं?
हाँ, कोई भी रख सकता है।
कितने प्रदोष व्रत रखें?
कई लोग 11 या 26 प्रदोष का संकल्प लेते हैं। यह श्रद्धा पर निर्भर है।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।