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दशहरा (विजयादशमी) पूजा विधि (Dussehra Puja Vidhi)

विजयादशमी पर अपराजिता पूजन, शस्त्र पूजन, शमी पूजा और रावण दहन से जुड़ी परंपराओं की सरल विधि, सामग्री और मंत्र।

⏱ लगभग 30–45 मिनट 🧺 14 सामग्री 🪔 12 चरण

कब करें

  • आश्विन शुक्ल दशमी (विजयादशमी)
  • अपराह्न का समय पूजन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

अपराजिता पूजन

देवी अपराजिता का स्मरण करके फूल अर्पित करें। यह विजय और रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

ॐ अपराजितायै नमः॥
7

शस्त्र या औज़ार पूजन

अपने औज़ार, कलम-किताब, उपकरण या वाहन को स्वच्छ करके तिलक लगाएँ और फूल चढ़ाएँ। यह आजीविका के साधनों के प्रति आभार है।

8

शमी पूजा

शमी के वृक्ष की पूजा कर पत्ते घर लाने की परंपरा है।

शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥
9

बड़ों को प्रणाम और मिठाई

बड़ों के चरण स्पर्श करें, शमी या सोने जैसे पत्ते भेंट कर शुभकामनाएँ दें।

10

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

11

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
12

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

अपराजिता
ॐ अपराजितायै नमः॥
शमी प्रार्थना
शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • नया कार्य आरंभ करने के लिए यह दिन शुभ माना जाता है

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • पटाखे और आतिशबाज़ी में सावधानी रखें
  • हथियारों के साथ असुरक्षित व्यवहार न करें

आम गलतियाँ

  • शस्त्र पूजन में असली शस्त्र लापरवाही से संभालना; केवल प्रतीकात्मक पूजन करें
  • रावण दहन की भीड़ में सुरक्षा की अनदेखी

शुभ मुहूर्त

दशमी तिथि और अपराह्न पूजा का समय पंचांग में देखें। यह तिथि अपने आप में शुभ मानी जाती है।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजयादशमी का महत्व क्या है?
यह श्रीराम की रावण पर विजय और माँ दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जुड़ा पर्व है।
शस्त्र पूजन क्यों?
यह आजीविका के साधनों के प्रति कृतज्ञता और सही उपयोग की प्रतिज्ञा है।
शमी के पत्ते क्यों दिए जाते हैं?
कुछ क्षेत्रों में इन्हें सोना माना जाता है और शुभकामना के रूप में दिया जाता है।
क्या दशहरे पर नया कार्य शुरू कर सकते हैं?
परंपरा में इसे अबूझ मुहूर्त जैसा शुभ माना जाता है। फिर भी बड़े निर्णय पंचांग और बड़ों की सलाह से लें।
दशहरे पर क्या खाएँ?
क्षेत्र के अनुसार मिठाई, जलेबी या सात्त्विक भोजन।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।