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नवरात्रि कलश स्थापना विधि (Navratri Kalash Sthapana Vidhi)

नवरात्रि में घटस्थापना कैसे करें: सामग्री, जौ बोने की विधि, कलश सजाना, दुर्गा पूजन, नौ दिन की दिनचर्या और विसर्जन।

⏱ स्थापना: लगभग 45–60 मिनट; पूरे नौ दिन प्रतिदिन पूजा 🧺 10 सामग्री 🪔 14 चरण

कब करें

  • चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के पहले दिन (प्रतिपदा)
  • स्थापना का शुभ समय पंचांग के अनुसार

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

जौ बोएँ

पात्र में साफ़ मिट्टी की परत बिछाकर जौ बोएँ, ऊपर फिर मिट्टी डालें और हल्का जल छिड़कें।

7

कलश तैयार करें

कलश में जल, थोड़ा गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। गले में कलावा बाँधकर ऊपर आम के पत्ते रखें।

8

नारियल स्थापना

नारियल पर लाल चुनरी लपेटकर कलश के ऊपर रखें और कलश को जौ के पात्र पर स्थापित करें।

9

माँ दुर्गा का आवाहन

चौकी पर माँ का चित्र स्थापित कर आवाहन करें और अखंड या सामान्य दीप जलाएँ।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
10

पूजन और भोग

रोली, सिंदूर, फूल, फल और भोग अर्पित कर दुर्गा चालीसा या सप्तशती का पाठ करें।

11

नौ दिन की दिनचर्या

प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा, आरती, जौ में हल्का जल और दीपक की देखभाल करें। अष्टमी/नवमी को कन्या पूजन की परंपरा है।

12

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

13

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
14

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

दुर्गा मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
नवार्ण मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
सर्वमंगल
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • नौ दिन सात्त्विक भोजन और संयम
  • दीपक बुझने न दें, तेल/घी पर्याप्त रखें

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • नौ दिन लहसुन-प्याज़ और मांसाहार से परहेज़ (परंपरा)
  • बाल-नाखून कटवाने से बचें (कई परिवारों की परंपरा)

आम गलतियाँ

  • अशुद्ध मिट्टी या बर्तन में जौ बोना
  • स्थापना के बाद घर खाली छोड़ देना
  • कलश को हिलाना-डुलाना

शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना का मुहूर्त पंचांग में प्रतिपदा तिथि के अनुसार दिया जाता है। अभिजित मुहूर्त भी शुभ माना जाता है। सही समय अपने शहर का पंचांग देखकर चुनें।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घटस्थापना कब करनी चाहिए?
नवरात्रि की प्रतिपदा को शुभ मुहूर्त में। समय के लिए पंचांग देखें।
अखंड दीप ज़रूरी है?
अनिवार्य नहीं। जो परिवार परंपरा से जलाते हैं वे जलाएँ; अन्यथा सुबह-शाम का सामान्य दीप भी चलता है।
जौ कब तक रखें?
नवरात्रि समाप्त होने पर विजयादशमी तक। बाद में श्रद्धा से बहते जल में या पौधे में विसर्जित करें।
क्या यात्रा में कलश छोड़ सकते हैं?
नौ दिन घर पर रहने की परंपरा है। अत्यावश्यक स्थिति में किसी विश्वसनीय सदस्य को दायित्व दें।
कन्या पूजन कब करें?
परंपरा में अष्टमी या नवमी को, 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को भोजन कराकर।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।