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एकादशी व्रत और पूजा विधि (Ekadashi Vrat Puja Vidhi)

एकादशी व्रत की विधि: दशमी के नियम, संकल्प, पूजन, क्या खाएँ और क्या नहीं, पारण का समय और सावधानियाँ।

⏱ पूजा: 30–45 मिनट; व्रत: दशमी रात से द्वादशी पारण तक 🧺 14 सामग्री 🪔 14 चरण

कब करें

  • हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी
  • वर्ष में लगभग 24 एकादशियाँ

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

दशमी की तैयारी

दशमी की संध्या में सात्त्विक, हल्का भोजन करें। चावल और तामसिक भोजन से बचें।

7

एकादशी की प्रातः

स्नान कर व्रत का संकल्प लें और विष्णु जी की पूजा करें।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
8

तुलसी और पीले फूल

तुलसी दल और पीले फूल अर्पित करें। एकादशी को तुलसी तोड़ने से बचें, पहले से तोड़े पत्ते लें या परिवार की परंपरा देखें।

9

कथा और जप

संबंधित एकादशी की कथा सुनें, विष्णु सहस्रनाम या नाम जप करें।

10

दिन भर का आचरण

फलाहार या निर्जल व्रत, भजन-कीर्तन, क्रोध-निंदा से दूर रहें।

11

पारण

द्वादशी में पंचांग के पारण समय पर, ज़रूरतमंद को भोजन या दान देकर व्रत खोलें।

12

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

13

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
14

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

द्वादशाक्षर
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
विष्णु स्मरण
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • व्रत में फल, दूध और सात्त्विक भोजन लें
  • पारण समय का पालन करें

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • अन्न और चावल से परहेज़ करें (परंपरा)
  • द्वादशी पर देर से पारण न करें

आम गलतियाँ

  • पारण का समय छोड़ देना
  • बीमार होते हुए भी कठोर व्रत करना; डॉक्टर की सलाह लें
  • केवल उपवास को ही व्रत समझना, संयम भी आवश्यक है

शुभ मुहूर्त

एकादशी की तिथि और पारण का समय हर महीने और शहर के अनुसार बदलता है। पंचांग या व्रत कैलेंडर देखें।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकादशी में चावल क्यों नहीं खाते?
परंपरा में एकादशी को चावल वर्जित माना जाता है। इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएँ बताई जाती हैं।
एकादशी का पारण कब करें?
द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद, पंचांग में दिए पारण के समय पर।
क्या बीमार व्यक्ति व्रत रखे?
डॉक्टर की सलाह से फलाहार या सरल नियम से रखें। सेहत पहले है।
एकादशी में क्या खाएँ?
फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा और आलू जैसी सात्त्विक चीज़ें।
कौन सी एकादशी सबसे महत्वपूर्ण है?
कई परिवार निर्जला और देवउठनी एकादशी को विशेष मानते हैं। यह परिवार की परंपरा पर निर्भर है।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।