📖 व्रत कथा
देवउठनी एकादशी व्रत कथा

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

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पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)

भाग १: योगनिद्रा

पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी से क्षीरसागर में शेषशय्या पर योगनिद्रा में चले जाते हैं। इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है।

भाग २: एक राजा का नियम

एक राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत करते थे। एक बार एक आदमी राजा से काम माँगने आया। राजा ने कहा कि एकादशी को केवल फलाहार मिलेगा। उसने स्वीकार किया, पर भूख से व्याकुल होकर बोला कि फलाहार से पेट नहीं भरता। राजा ने उसे अन्न दे दिया।

भाग ३: भक्ति की परीक्षा

उसने भोजन बनाकर भगवान को आमंत्रित किया। भगवान आए, पर उसके सरल भाव से प्रसन्न होकर साथ भोजन किया और उसे अपने धाम ले गए। राजा को समझ आया कि व्रत मन की शुद्धता से सफल होता है, केवल नियम से नहीं।

इति देवउठनी एकादशी कथा संपूर्ण