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शनि पूजा विधि (Shani Puja Vidhi)

शनिवार को शनि देव की पूजा कैसे करें: सामग्री, तेल अभिषेक, पीपल पूजा, मंत्र और नियम।

⏱ लगभग 30 मिनट 🧺 7 सामग्री 🪔 12 चरण

कब करें

  • प्रत्येक शनिवार
  • शनि जयंती
  • शनि अमावस्या

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

तेल अर्पण

शनि प्रतिमा पर सरसों का तेल चढ़ाएँ।

ॐ शं शनैश्चराय नमः॥
7

काले तिल और उड़द

काले तिल और उड़द अर्पित करें।

8

दीपक

सरसों के तेल का दीपक जलाएँ, पीपल के नीचे भी जलाया जाता है।

9

पाठ

शनि चालीसा या शनि मंत्र का जप करें।

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥
10

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

11

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
12

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

शनि मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः॥
बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • ज़रूरतमंद की सेवा करें
  • श्रमिकों और बुज़ुर्गों का सम्मान करें

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • शनिवार को सीधे शनि देव की आँखों में न देखें (परंपरा)
  • अहंकार और अन्याय से बचें

आम गलतियाँ

  • डर के कारण पूजा करना; इसे कर्तव्य और अनुशासन का अभ्यास मानें
  • ज्योतिषीय निर्णय बिना कुंडली देखे लेना; किसी जानकार को कुंडली दिखाएँ

शुभ मुहूर्त

शनिवार को सूर्यास्त के आसपास पूजा प्रशस्त मानी जाती है। शनि जयंती का समय पंचांग से देखें।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शनि देव को क्या चढ़ाएँ?
सरसों का तेल, काले तिल, उड़द दाल, नीले फूल और काला वस्त्र।
साढ़े साती में क्या करें?
ज्योतिषीय निर्णय के लिए अपनी कुंडली किसी जानकार को दिखाएँ। परंपरा में सेवा, दान और अनुशासन का पालन बताया जाता है।
शनिवार को क्या दान करें?
अपनी क्षमता से तेल, काले तिल, वस्त्र या भोजन।
क्या शनि की पूजा सूर्यास्त के बाद करें?
शाम को पूजा की परंपरा है, पर दिन में भी कर सकते हैं।
क्या शनि के लिए व्रत ज़रूरी है?
अनिवार्य नहीं। श्रद्धा से कई लोग शनिवार को व्रत रखते हैं।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।