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दुर्गा पूजा विधि (Durga Puja Vidhi)

माँ दुर्गा की पूजा घर पर कैसे करें: सामग्री, चरण, मंत्र, चालीसा-आरती और अष्टमी-नवमी पूजा के नियम।

⏱ लगभग 40–60 मिनट 🧺 14 सामग्री 🪔 13 चरण

कब करें

  • नवरात्रि
  • प्रत्येक मंगलवार या शुक्रवार (श्रद्धा अनुसार)
  • अष्टमी और नवमी

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

पूजा विधि (चरणबद्ध)

1

स्नान और शुद्धि

स्नान करके स्वच्छ, यथासंभव धुले हुए वस्त्र पहनें। मन शांत रखें और मोबाइल दूर रख दें।

2

स्थान तैयार करें

पूजा स्थल को साफ़ करें। पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा श्रेष्ठ मानी जाती है। चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाएँ और मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

3

दीप और आचमन

दीपक और धूप जलाएँ। दाएँ हाथ में जल लेकर तीन बार आचमन करें।

ॐ केशवाय नमः। ॐ नारायणाय नमः। ॐ माधवाय नमः।
4

संकल्प

हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर अपना नाम, गोत्र (यदि ज्ञात हो) और पूजा का उद्देश्य मन में बोलें, फिर जल भूमि पर छोड़ दें। सरल भाषा में संकल्प भी मान्य है।

5

गणेश वंदना

किसी भी पूजा से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा में शुभ माना गया है।

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
6

देवी की स्थापना

चौकी पर लाल वस्त्र पर माँ दुर्गा का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।

7

आवाहन

माँ का आवाहन कर आसन अर्पित करें।

ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
8

श्रृंगार और चुनरी

चुनरी, सिंदूर, बिंदी और सुहाग सामग्री अर्पित करें।

9

पुष्प और भोग

लाल फूल चढ़ाकर नारियल, फल और हलवा-चने का भोग लगाएँ।

10

पाठ

दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती के चुने हुए अध्याय पढ़ें।

11

आरती

घी के दीपक से आरती करें। परिवार के सभी सदस्य साथ खड़े हों और अंत में आरती लें।

12

क्षमा प्रार्थना

पूजा में जो भी भूल हुई हो, उसके लिए विनम्रता से क्षमा माँगें।

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
13

प्रसाद और समापन

प्रसाद सबमें बाँटें और स्वयं भी ग्रहण करें। बड़ों से आशीर्वाद लें। फूल आदि पूजा सामग्री बहते जल में या पेड़ के नीचे विसर्जित करें, कचरे में न डालें।

मंत्र

दुर्गा बीज
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
नवार्ण
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
सर्वमंगल
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

✔ क्या करें

  • पूजा से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र
  • शांत मन और श्रद्धा से बैठें
  • भोग साफ़-सुथरा और घर में बना हुआ रखें
  • पूजा के बाद प्रसाद सबमें बाँटें
  • कन्याओं का आदर करें
  • सात्त्विक रहें

✘ क्या न करें

  • पूजा के बीच में फोन या बातचीत में न उलझें
  • क्रोध, निंदा और कटु वाणी से बचें
  • बासी या अशुद्ध फूल-भोग न चढ़ाएँ
  • मूर्ति या चित्र को सीधे ज़मीन पर न रखें
  • नवरात्रि में तामसिक भोजन से बचें
  • विवाद और क्रोध से दूर रहें

आम गलतियाँ

  • पाठ को जल्दबाज़ी में बिना उच्चारण पर ध्यान दिए पढ़ना
  • कन्या भोजन में केवल औपचारिकता निभाना

शुभ मुहूर्त

अष्टमी-नवमी की तिथि और पूजा का समय अपने शहर के पंचांग में देखें।

आज का पंचांग देखें →   त्योहार कैलेंडर →

संबंधित आरती, कथा और मंत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा पूजा में कौन सा रंग शुभ है?
लाल और पीला रंग परंपरा में शुभ माने जाते हैं।
क्या सप्तशती का पाठ घर पर कर सकते हैं?
हाँ, श्रद्धा से कर सकते हैं। पूरा पाठ कठिन लगे तो चुने हुए अध्याय या चालीसा पढ़ें।
कन्या पूजन में कितनी कन्याएँ बुलाएँ?
परंपरा में 9 कन्याएँ और एक बालक (भैरव स्वरूप)। संख्या सुविधा अनुसार रखी जा सकती है।
देवी को क्या भोग लगाएँ?
हलवा, चना, पूरी, खीर और फल।
दुर्गा पूजा शुक्रवार को कर सकते हैं?
हाँ, मंगलवार और शुक्रवार को भी श्रद्धा से कर सकते हैं।

अन्य पूजा विधियाँ

नोट: पूजा की विधियाँ परिवार, क्षेत्र और संप्रदाय के अनुसार बदलती हैं। यहाँ दी गई विधि एक सरल, सामान्य रूप है। अपने कुल की परंपरा या पंडित जी के मार्गदर्शन को प्राथमिकता दें।