पं. शिवानन्द स्वामी
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर मुनिजन सेवत, तिनके दुःखहारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
शुम्भ निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा, और बाजत डमरू॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भर्ता।
भक्तन की दुःख हर्ता, सुख सम्पत्ति कर्ता॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवाँछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥
श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥
ॐ जय अम्बे गौरी॥