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पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)
भाग १: समुद्र मंथन और लक्ष्मी
पुराणों में कथा है कि देवताओं और असुरों के समुद्र मंथन में कार्तिक अमावस्या के आसपास माता लक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने भगवान विष्णु को पति रूप में चुना। इसी स्मृति में दीपावली पर लक्ष्मी पूजन होता है।
भाग २: राजा बलि और दीपदान
एक कथा में राजा बलि के बंदी बनाए गए देवताओं की मुक्ति और लक्ष्मी जी की वापसी का प्रसंग आता है, जिसकी स्मृति में दीप जलाए जाते हैं। यह प्रसंग क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रूपों में सुनाया जाता है।
भाग ३: परिश्रमी किसान और लक्ष्मी
लोककथा में एक परिश्रमी और सत्यनिष्ठ किसान के घर लक्ष्मी जी वास करती हैं। जब घर में आलस्य और कलह आया तो वे चली गईं, और जब पुनः स्वच्छता, परिश्रम और प्रेम आया तो वे लौटीं। कथा का संदेश है कि लक्ष्मी वहीं टिकती हैं जहाँ परिश्रम और सद्भाव हो।
इति दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा संपूर्ण