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दीपावली (दिवाली)

Diwali
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📅 आगामी तिथियाँ (Upcoming dates)

8 नवंबर 2026, रविवार · दीपावली 19 दिन बाद
29 अक्टूबर 2027, शुक्रवार · दिवाली 374 दिन बाद

सटीक मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, आज का पंचांग देखें।

दीपावली क्यों मनाई जाती है (Why Diwali is celebrated)

दीपावली अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा का पर्व है। "दीपावली" का अर्थ है दीपों की पंक्ति। अलग-अलग परंपराओं में इसके अलग कारण बताए जाते हैं: • उत्तर भारत में मान्यता है कि चौदह वर्ष के वनवास और रावण-वध के बाद श्रीराम अयोध्या लौटे, और अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। • कई परंपराओं में इस रात को माता लक्ष्मी के प्राकट्य और पूजन से जोड़ा जाता है, इसलिए लक्ष्मी-गणेश पूजन मुख्य अनुष्ठान है। • दक्षिण भारत और कुछ अन्य क्षेत्रों में नरक चतुर्दशी को श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की स्मृति से जोड़ा जाता है। • बंगाल, ओडिशा और असम के कई भागों में इस रात काली पूजा होती है। • जैन परंपरा में यह भगवान महावीर के निर्वाण का दिन है, और सिख परंपरा में "बंदी छोड़ दिवस" के रूप में गुरु हरगोबिंद साहिब की मुक्ति का स्मरण किया जाता है।

कब मनाई जाती है: पाँच दिन का उत्सव (When it falls)

दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है (अमांत पंचांग वाले क्षेत्रों में यही अमावस्या आश्विन मास की गिनी जाती है)। उत्सव आमतौर पर पाँच दिन चलता है: १. धनतेरस, कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी: धन्वंतरि पूजन, नया बर्तन या सोना-चाँदी खरीदने की परंपरा। २. नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), चतुर्दशी: अभ्यंग स्नान और यम के नाम का दीपदान। ३. दीपावली, अमावस्या: लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीपोत्सव। ४. गोवर्धन पूजा / अन्नकूट, शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा: गोवर्धन पर्वत और गौ पूजन; गुजरात में इसी दिन नववर्ष (बेस्तु वरस) मनाया जाता है। ५. भाई दूज, द्वितीया: बहन द्वारा भाई का तिलक। कभी-कभी तिथियाँ दो दिनों में बँट जाती हैं, इसलिए दो पर्व एक ही दिन आ सकते हैं या दीपावली दो दिन बताई जा सकती है। सही दिन के लिए ऊपर दी गई तारीखें और अपने शहर का पंचांग देखें।

लक्ष्मी पूजन का शुभ समय (Puja timing)

परंपरा में लक्ष्मी पूजन अमावस्या की संध्या को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का लगभग दो से तीन घंटे का समय) में किया जाता है। बहुत से पंचांग इसमें स्थिर लग्न (जैसे वृषभ) को भी श्रेष्ठ मानते हैं। शहर के अनुसार सूर्यास्त और मुहूर्त बदलते हैं, इसलिए अपने स्थान का समय आज के पंचांग पेज या स्थानीय पंडित से देख लें।

पूजा सामग्री सूची (Samagri checklist)

• लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति या चित्र, चौकी, लाल या पीला वस्त्र • कलश, आम के पत्ते, नारियल, जल, गंगाजल • रोली, चंदन, हल्दी, अक्षत, कुमकुम, सिंदूर, मौली • कमल या गेंदे के फूल, माला, दूर्वा (गणेश जी के लिए) • धूप, अगरबत्ती, कपूर, घी और तेल के दीपक, रुई की बातियाँ • पान, सुपारी, लौंग, इलायची, सिक्के, खील, बताशे, मिठाई, मेवे, फल • चाँदी या सोने का सिक्का, बही-खाता या व्यापारिक पुस्तकें (व्यापारियों के लिए) • शंख, घंटी, आरती की थाली • रंगोली के रंग, तोरण, मिट्टी के दीपक

लक्ष्मी-गणेश पूजन विधि (Puja vidhi)

१. शाम से पहले घर की सफाई करें, द्वार पर रंगोली बनाएँ और तोरण लगाएँ। दीपक सजाएँ। २. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान पर चौकी पर वस्त्र बिछाकर गणेश जी और लक्ष्मी जी को स्थापित करें। गणेश जी दाईं ओर और लक्ष्मी जी उनके बाएँ बैठाने की परंपरा है। ३. हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें। ४. सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें, फिर कलश और नवग्रह का स्मरण करें। ५. लक्ष्मी जी का आवाहन करके उन्हें स्नान, वस्त्र, चंदन, फूल, माला अर्पित करें। ६. खील-बताशे, मिठाई और फल का भोग लगाएँ। ७. धूप-दीप दिखाएँ। "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का जप करें (108 बार, माला से)। ८. लक्ष्मी जी की आरती करें, फिर गणेश जी की आरती। ९. घर में हर कमरे, द्वार और आँगन में दीपक जलाएँ। कई घरों में रात भर एक दीपक जलता रखने की परंपरा है। १०. प्रसाद बाँटें और बड़ों का आशीर्वाद लें।

मंत्र (Mantras)

• लक्ष्मी मंत्र: "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः" • लक्ष्मी बीज मंत्र: "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" • गणेश मंत्र: "ॐ गं गणपतये नमः" • कुबेर मंत्र: "ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा" इनके पाठ इस पेज के नीचे दिए गए मंत्र लिंकों पर देख सकते हैं।

क्षेत्रीय परंपराएँ (Regional variations)

• उत्तर भारत: लक्ष्मी-गणेश पूजन, दीपदान, रंगोली, मिठाई और उपहार। • गुजरात और राजस्थान: चोपड़ा पूजन (बही-खाता पूजन) और नववर्ष। • बंगाल, ओडिशा, असम: काली पूजा। • महाराष्ट्र: वसुबारस, धनत्रयोदशी और पाडवा (शुक्ल प्रतिपदा) का विशेष महत्व। • तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र: प्रातः तेल स्नान (गंगा स्नान) और नरक चतुर्दशी का उत्सव।

क्या करें और क्या न करें (Do's and don'ts)

• घर, द्वार और पूजा स्थान साफ रखें, मन शांत और प्रसन्न रखें। • बड़ों का आशीर्वाद लें, ज़रूरतमंदों को मिठाई, वस्त्र या दीप दान करें। • पटाखे चलाएँ तो स्थानीय नियमों, सुरक्षा और वायु-ध्वनि प्रदूषण का ध्यान रखें। बच्चों को बड़ों की निगरानी में ही पटाखे दें। • जुआ, नशा और झगड़े से बचें। परंपरा में दीपावली को शुभ और शांत रखने की सलाह है। • दीपकों और बिजली की सजावट में आग से सावधानी रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का सबसे अच्छा समय कौन-सा है? उत्तर: परंपरा में अमावस्या की संध्या का प्रदोष काल, और कई पंचांगों में स्थिर लग्न। सटीक समय आपके शहर के सूर्यास्त पर निर्भर है, इसलिए पंचांग देखें। प्रश्न: क्या दीपावली दो दिन क्यों बताई जाती है? उत्तर: जब अमावस्या तिथि दो दिनों में फैली हो या प्रदोष काल में पूरी न बैठती हो, तब अलग-अलग पंचांग अलग दिन बताते हैं। अपने क्षेत्र की परंपरा और पंडित की सलाह अपनाएँ। प्रश्न: धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है? उत्तर: बर्तन (विशेषकर पीतल या चाँदी के), सिक्का और झाड़ू खरीदने की परंपरा है। यह मान्यता है, अनिवार्य नियम नहीं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदें। प्रश्न: क्या घर पर बिना पंडित के लक्ष्मी पूजन किया जा सकता है? उत्तर: हाँ। ऊपर दी गई विधि से परिवार के सदस्य श्रद्धा से पूजन कर सकते हैं। प्रश्न: Diwali Lakshmi Puja at home: what is the simple order? उत्तर: Clean the house, light lamps, set up Lakshmi and Ganesh, take the sankalp, worship Ganesh first, then Lakshmi, offer sweets, chant "Om Shreem Mahalakshmyai Namah", do aarti, and share prasad.

परंपराएँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। पूजा-विधि के लिए अपने पंडित या कुल-परंपरा की सलाह लें।