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30 सितंबर 2027, बृहस्पतिवार
345 दिन बाद
सटीक मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, आज का पंचांग देखें।
नवरात्रि का महत्व
कब मनाई जाती है
नौ दुर्गा: नौ देवियाँ
पूजा सामग्री सूची
घटस्थापना और पूजन विधि
उपवास के नियम और भोजन
क्षेत्रीय परंपराएँ
क्या करें और क्या न करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि का महत्व (Why Navratri is celebrated)
नवरात्रि का अर्थ है "नौ रातें"। इन नौ रातों और दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है। यह शक्ति की उपासना का पर्व है। देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में महिषासुर के वध की कथा आती है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
नवरात्रि आत्मशुद्धि, संयम, उपवास और साधना का भी समय माना जाता है।
कब मनाई जाती है (When it falls)
एक वर्ष में चार नवरात्रि मानी जाती हैं: चैत्र (वसंत), आश्विन या शारदीय (सबसे प्रसिद्ध), तथा आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि। चैत्र और शारदीय नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक चलती हैं। शारदीय नवरात्रि के बाद दशमी को विजयादशमी (दशहरा) आता है, और चैत्र नवरात्रि का समापन राम नवमी के साथ जुड़ा है। नवरात्रि की तारीखें ऊपर दी गई हैं। कभी तिथि का क्षय या वृद्धि होने पर नवरात्रि आठ या दस दिन की भी हो सकती है।
नौ दुर्गा: नौ देवियाँ (The nine forms)
१. शैलपुत्री — पर्वतराज हिमालय की पुत्री, पहला दिन
२. ब्रह्मचारिणी — तप और संयम की देवी
३. चंद्रघंटा — शांति और साहस की देवी
४. कूष्मांडा — सृष्टि की रचयिता
५. स्कंदमाता — कार्तिकेय (स्कंद) की माता
६. कात्यायनी — महर्षि कात्यायन की पुत्री, महिषासुरमर्दिनी
७. कालरात्रि — भय का नाश करने वाली
८. महागौरी — शुद्धता और शांति का स्वरूप
९. सिद्धिदात्री — सिद्धियाँ देने वाली देवी
पूजा सामग्री सूची (Samagri checklist)
• माँ दुर्गा की मूर्ति या चित्र, चौकी, लाल वस्त्र
• कलश (मिट्टी या ताँबे का), आम के पत्ते, नारियल, लाल चुनरी, मौली
• जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र, मिट्टी और जौ
• रोली, चंदन, अक्षत, सिंदूर, हल्दी, कुमकुम
• लाल फूल (विशेषकर गुड़हल), माला
• धूप, दीप, कपूर, घी, अखंड ज्योति के लिए बड़ा दीपक
• फल, मिठाई, नारियल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची
• श्रृंगार का सामान (माँ को अर्पण के लिए)
• दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा की पुस्तक
• कन्या पूजन के लिए: हलवा, पूरी, काले चने, उपहार, चुनरी
घटस्थापना और पूजन विधि (Puja vidhi)
१. प्रतिपदा के दिन प्रातः स्नान करके शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) करें। मुहूर्त पंचांग से देखें। सामान्यतः प्रातःकाल या अभिजित मुहूर्त श्रेष्ठ माना जाता है।
२. पूजा स्थान साफ करके मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ, उस पर जल से भरा कलश रखें। कलश पर आम के पत्ते, नारियल और चुनरी रखें।
३. माँ दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें। गणेश जी, कलश और नवग्रह का पूजन करें।
४. संकल्प लेकर अखंड ज्योति जलाएँ (परंपरा अनुसार)।
५. नौ दिन प्रतिदिन उस दिन की देवी का पूजन करें: रोली, चंदन, अक्षत, फूल और भोग अर्पित करें।
६. दुर्गा सप्तशती, नवार्ण मंत्र या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
७. प्रतिदिन आरती करें। जौ को नित्य जल से सींचें।
८. अष्टमी या नवमी को हवन और कन्या पूजन करें: नौ कन्याओं (और एक बालक) को भोजन कराएँ, चरण धोएँ, तिलक करें और उपहार दें।
९. दशमी को पूजन के बाद कलश का जल घर में छिड़कें और जौ को जल में प्रवाहित करें या पौधों में डालें।
उपवास के नियम और भोजन (Fasting)
बहुत से लोग नौ दिन या पहले और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। उपवास में आमतौर पर कुट्टू या सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, समा के चावल, आलू, मूँगफली, फल, दूध, दही और सेंधा नमक लिया जाता है। अनाज, सामान्य नमक, प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूरी रखी जाती है। अपनी सेहत के अनुसार उपवास चुनें।
क्षेत्रीय परंपराएँ (Regional variations)
• गुजरात और राजस्थान: गरबा और डांडिया रास की रातें।
• बंगाल, असम, ओडिशा: दुर्गा पूजा (षष्ठी से दशमी), पंडालों में प्रतिमा स्थापना, धुनुची नाच और सिंदूर खेला।
• उत्तर भारत: रामलीला, घटस्थापना और कन्या पूजन।
• दक्षिण भारत: तमिलनाडु और आंध्र में गोलू, यानी गुड़ियों की झाँकी।
• महाराष्ट्र: घटस्थापना और रोज़ की देवी पूजा।
क्या करें और क्या न करें (Do's and don'ts)
• घर और मन की शुद्धता रखें। सात्विक भोजन और संयमित जीवन अपनाएँ।
• नौ दिन देवी के नाम का जप, सप्तशती या चालीसा का पाठ करें।
• कन्याओं का सम्मान करें और उन्हें प्रसन्न रखें।
• क्रोध, झूठ और निंदा से दूर रहें।
• प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहें।
• उपवास में अपनी सेहत का ध्यान रखें, बीमार, गर्भवती और वृद्ध लोग हल्का उपवास रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: घटस्थापना कब करनी चाहिए?
उत्तर: प्रतिपदा तिथि में, प्रातःकाल या अभिजित मुहूर्त में, पंचांग के अनुसार। सटीक समय अपने शहर के पंचांग से देखें।
प्रश्न: क्या नवरात्रि में नौ दिन उपवास आवश्यक है?
उत्तर: नहीं। कई लोग केवल पहले और अंतिम दिन या अष्टमी का उपवास रखते हैं। आप अपनी सेहत और परंपरा के अनुसार चुनें।
प्रश्न: कन्या पूजन कब किया जाता है?
उत्तर: अष्टमी या नवमी को। नौ कन्याओं और एक बालक को भोजन कराकर उपहार दिए जाते हैं।
प्रश्न: Chaitra and Sharad Navratri: what is the difference?
उत्तर: Both are nine-night festivals of Goddess Durga. Chaitra Navratri comes in spring and ends around Ram Navami; Sharad Navratri comes in autumn and is followed by Dussehra. The rituals are largely the same.
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अन्य त्योहार गाइड
परंपराएँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। पूजा-विधि के लिए अपने पंडित या कुल-परंपरा की सलाह लें।