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भाई दूज

Bhai Dooj
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📅 आगामी तिथियाँ (Upcoming dates)

11 नवंबर 2026, बुधवार · भाई दूज 19 दिन बाद
31 अक्टूबर 2027, रविवार · भाई दूज 373 दिन बाद

सटीक मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, आज का पंचांग देखें।

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भाई दूज का महत्व (Why Bhai Dooj is celebrated)

भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाई जाती है और यह दीपावली के पाँच दिवसीय उत्सव का अंतिम दिन है। इसे यम द्वितीया भी कहा जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु, सुख और समृद्धि की कामना करती हैं और भाई उन्हें उपहार देकर रक्षा का वचन निभाते हैं। कथा के अनुसार सूर्य पुत्री यमुना ने अपने भाई यमराज को घर बुलाकर तिलक किया और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन से तिलक करवाएगा और उसके घर भोजन करेगा, उसे यम का भय नहीं रहेगा। इसी कारण इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।

कब मनाई जाती है (When it falls)

भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाई जाती है, जो प्रायः दीपावली के दो दिन बाद पड़ती है। परंपरा में तिलक के लिए अपराह्न यानी दोपहर के बाद का समय शुभ माना गया है। ऊपर दी गई कैलेंडर तारीख देखें और सटीक मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग देखें।

अलग-अलग नाम (Regional names)

• उत्तर भारत में इसे भाई दूज या भैया दूज कहते हैं। • महाराष्ट्र और गोवा में भाऊबीज कहा जाता है। • बंगाल में यह भाई फोंटा के नाम से प्रसिद्ध है, जिसमें बहनें भाई के माथे पर चंदन का टीका लगाती हैं। • नेपाल में इसे भाई टीका के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

पूजा सामग्री सूची (Samagri checklist)

• पूजा की थाली, रोली या कुमकुम, चंदन, अक्षत (साबुत चावल) • दीपक, कपूर, घी • नारियल या गोला, मिश्री, मिठाई • कलावा (मौली), फूल, पान-सुपारी • भाई के लिए उपहार और बहन के हाथ का बना भोजन

तिलक की विधि (How the tilak is done)

१. भाई और बहन दोनों स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। २. भाई को साफ़ आसन पर बैठाएँ। बहन थाली सजाकर दीपक जलाए। ३. बहन भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाए और कलावा बाँधे। ४. भाई की आरती उतारें और उसकी लंबी आयु व सुख की कामना करें। ५. भाई को मिश्री, नारियल या मिठाई खिलाएँ। ६. भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार दे और उसकी रक्षा का संकल्प दोहराए। ७. बहन के हाथ का बना भोजन ग्रहण करना शुभ माना जाता है। जो भाई-बहन दूर रहते हैं, वे फोन या वीडियो कॉल पर शुभकामनाएँ दें और उपहार तथा मिठाई भेजकर पर्व मना सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1भाई दूज 2026 में कब है?
भाई दूज 11 नवंबर 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। सटीक पूजा मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
2भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?
रक्षाबंधन पर बहन भाई की कलाई पर राखी बाँधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। भाई दूज पर बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु की कामना करती है। रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को और भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को आती है।
3भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?
कथा के अनुसार यमुना ने अपने भाई यमराज को तिलक करके भोजन कराया था और यमराज ने वरदान दिया था कि इस दिन बहन से तिलक करवाने वाले भाई को यम का भय नहीं रहेगा। इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।
4भाई दूज पर तिलक का शुभ समय कब होता है?
परंपरा में अपराह्न यानी दोपहर के बाद का समय तिलक के लिए शुभ माना जाता है। सटीक मुहूर्त शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
5अगर भाई दूर रहता हो तो भाई दूज कैसे मनाएँ?
बहन भाई को वीडियो कॉल पर तिलक की रस्म दिखा सकती है और मिठाई तथा उपहार भेज सकती है। रिश्ते का स्नेह और शुभकामना ही इस पर्व का मूल है।
6भाई दूज पर बहन को क्या उपहार दें?
वस्त्र, आभूषण, मिठाई, नकद शगुन या कोई उपयोगी वस्तु दी जा सकती है। उपहार की कीमत से ज़्यादा स्नेह और सम्मान महत्वपूर्ण है।
7भाई दूज की कथा क्या है?
कथा के अनुसार यमुना ने अपने भाई यमराज को घर बुलाकर तिलक किया और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक करवाने वाले भाई को यम का भय नहीं रहेगा।
8अगर बहन न हो तो भाई दूज कैसे मनाएँ?
भाई चचेरी, ममेरी या मुँहबोली बहन, बुआ या मौसी से तिलक करवा सकता है। रिश्ते का भाव ही इस पर्व का मूल है।

परंपराएँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। पूजा-विधि के लिए अपने पंडित या कुल-परंपरा की सलाह लें।