📅 आगामी तिथियाँ (Upcoming dates)
25 अक्टूबर 2026, रविवार
· शरद पूर्णिमा
2 दिन बाद
14 अक्टूबर 2027, बृहस्पतिवार
· शरद पूर्णिमा
356 दिन बाद
सटीक मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, आज का पंचांग देखें।
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शरद पूर्णिमा का महत्व
कब मनाई जाती है
पूजा सामग्री सूची
पूजन विधि
पौराणिक मान्यताएँ
मंत्र और पाठ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शरद पूर्णिमा का महत्व (Why Sharad Purnima is celebrated)
शरद पूर्णिमा आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें विशेष शीतलता देने वाली मानी जाती हैं। इसी कारण यह रात धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत शुभ मानी गई है।
परंपरा के अनुसार इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करते हुए पूछती हैं "को जागर्ति?" यानी कौन जाग रहा है। इसीलिए रात्रि जागरण और लक्ष्मी पूजन का विधान है। वैष्णव परंपरा में इसी रात भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला का स्मरण किया जाता है।
कब मनाई जाती है (When it falls)
यह पर्व आश्विन शुक्ल पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है, जब चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि व्याप्त हो। ऊपर दी गई कैलेंडर तारीख देखें और अपने शहर के चंद्रोदय तथा पूर्णिमा तिथि के समय के लिए पंचांग देखें। यह वर्षा ऋतु के अंत और शरद ऋतु के आरंभ का संकेत भी माना जाता है।
पूजा सामग्री सूची (Samagri checklist)
• माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु (या श्रीकृष्ण) की मूर्ति या चित्र, चौकी, लाल या पीला वस्त्र
• कलश, जल, गंगाजल, नारियल, आम के पत्ते
• रोली, चंदन, अक्षत, हल्दी, कमल या गुलाब के फूल
• धूप, घी के दीपक, कपूर
• खीर (दूध, चावल, शक्कर या मिश्री और मेवों से बनी), फल, मिठाई
• खीर रखने के लिए साफ़ बर्तन और ढकने के लिए पतला साफ़ कपड़ा
पूजन विधि (Puja vidhi)
१. प्रातः स्नान करके पूजा का संकल्प लें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दिन में फलाहार या सादा भोजन रखें।
२. संध्या को पूजा स्थल को स्वच्छ करें, चौकी पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
३. कलश स्थापित कर दीप जलाएँ और रोली, अक्षत, फूल से पूजन करें।
४. लक्ष्मी मंत्रों का जप करें और माता लक्ष्मी की आरती करें।
५. दूध और चावल से खीर बनाकर भगवान को भोग लगाएँ।
६. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दें। खीर को साफ़ कपड़े से ढककर चाँदनी में रखें।
७. रात में भजन, कीर्तन या मंत्र जप करते हुए जागरण करें।
८. अगली सुबह स्नान के बाद खीर को प्रसाद के रूप में परिवार में बाँटें।
पौराणिक मान्यताएँ (Beliefs and traditions)
• कुछ मान्यताओं में इसी दिन माता लक्ष्मी का प्राकट्य माना जाता है, इसलिए लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है।
• ब्रज में इस रात श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा कहा जाता है।
• बंगाल और ओडिशा में इसे कोजागरी लक्ष्मी पूजा और कुमार पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। ओडिशा में कुमार पूर्णिमा पर कुमारी कन्याएँ चंद्र पूजन करती हैं।
• खीर को चाँदनी में रखने की परंपरा एक धार्मिक मान्यता है। इसे श्रद्धा के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
मंत्र और पाठ (Mantras to chant)
इस रात माता लक्ष्मी और चंद्र देव के मंत्रों का जप शुभ माना जाता है। नीचे दिए गए लिंक से लक्ष्मी गायत्री, लक्ष्मी बीज मंत्र, लक्ष्मी चालीसा, महालक्ष्मी अष्टकम् और चंद्र बीज मंत्र पढ़ सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1शरद पूर्णिमा 2026 में कब है?
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। सटीक पूजा मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
2शरद पूर्णिमा पर खीर चाँदनी में क्यों रखी जाती है?
मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणें विशेष शीतलता और पोषण देने वाली होती हैं। इसलिए खीर को ढककर रात भर खुले आकाश के नीचे रखा जाता है और सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह एक धार्मिक परंपरा है।
3कोजागरी पूर्णिमा का क्या अर्थ है?
"को जागर्ति" का अर्थ है "कौन जाग रहा है"। मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी जागने वाले भक्तों पर कृपा करती हैं, इसलिए रात्रि जागरण किया जाता है।
4शरद पूर्णिमा की पूजा किस समय करें?
पूजा संध्या से लेकर चंद्रोदय के बाद तक की जाती है। सटीक पूर्णिमा तिथि और चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
5शरद पूर्णिमा पर कौन से मंत्र पढ़ने चाहिए?
माता लक्ष्मी के मंत्र जैसे लक्ष्मी गायत्री और लक्ष्मी बीज मंत्र, तथा चंद्र देव का बीज मंत्र पढ़ा जाता है। इस पृष्ठ पर इनके लिंक दिए गए हैं।
6शरद पूर्णिमा के दिन क्या करें और क्या न करें?
करें: सुबह स्नान और पूजा, संध्या में लक्ष्मी पूजन, चंद्रोदय के बाद अर्घ्य, भजन-कीर्तन या जागरण, खीर का भोग और सामर्थ्य अनुसार दान।
न करें: क्रोध, कलह और अपशब्द से बचें। परंपरा में व्रत के दिन तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
7शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे रखा जाता है?
मान्यता में इस दिन व्रत रखकर संध्या को लक्ष्मी-विष्णु पूजन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद फलाहार या सात्विक भोजन किया जाता है। व्रत का स्वरूप अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा के अनुसार तय करें।
8शरद पूर्णिमा पर दान का क्या महत्व है?
परंपरा में इस दिन चावल, दूध, खीर, वस्त्र या अन्न का दान शुभ माना जाता है। दान अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार करें।
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अन्य त्योहार गाइड
परंपराएँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। पूजा-विधि के लिए अपने पंडित या कुल-परंपरा की सलाह लें।