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छठ पूजा

Chhath Puja
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📅 आगामी तिथियाँ (Upcoming dates)

15 नवंबर 2026, रविवार · छठ पूजा 26 दिन बाद
4 नवंबर 2027, बृहस्पतिवार · छठ पूजा 380 दिन बाद

सटीक मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, आज का पंचांग देखें।

छठ पूजा का महत्व (Why Chhath is celebrated)

छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया (षष्ठी देवी) की आराधना का पर्व है। इसमें अस्त होते और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर आभार प्रकट किया जाता है। यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में मनाया जाता है, और अब देश-विदेश में बसे पूर्वांचल के लोग भी इसे उतनी ही श्रद्धा से मनाते हैं। यह पर्व शुद्धता, संयम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का पर्व है। व्रती परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की रक्षा और आरोग्य के लिए कठिन व्रत रखते हैं।

कब मनाई जाती है: चार दिन (When it falls)

छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाई जाती है, दीपावली के लगभग छह दिन बाद। चैत्र मास में भी चैती छठ मनाया जाता है। चार दिन का क्रम: १. नहाय-खाय (चतुर्थी): स्नान के बाद शुद्ध सात्विक भोजन, आमतौर पर कद्दू-भात और चने की दाल। २. खरना (पंचमी): दिन भर उपवास, शाम को गुड़ की खीर (रसिया) और रोटी का प्रसाद। इसके बाद लगभग 36 घंटे का निर्जल व्रत शुरू होता है। ३. संध्या अर्घ्य (षष्ठी): शाम को नदी, तालाब या घाट पर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य। ४. उषा अर्घ्य (सप्तमी): भोर में उगते सूर्य को अर्घ्य, फिर पारण। तिथि के अनुसार दिनों में थोड़ा अंतर आ सकता है, इसलिए ऊपर दी गई तारीखें देखें।

पूजा सामग्री सूची (Samagri checklist)

• बाँस के सूप और दउरा (टोकरी), दीपक, मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी (खरना के प्रसाद के लिए) • ठेकुआ (गुड़-आटे का प्रसाद), चावल के लड्डू (कसार) • गन्ना, नारियल, केला, सिंघाड़ा, सेब, संतरा, नींबू, अदरक-हल्दी का पौधा, मूली और अन्य मौसमी फल • सुथनी, शकरकंद, पान, सुपारी, मिठाई • फूल, माला, चंदन, रोली, अक्षत, धूप, दीप, कपूर • नए या स्वच्छ वस्त्र (महिलाएँ प्रायः बिना सिले या नए वस्त्र पहनती हैं) • जल से भरे लोटे या कलश, दूध

व्रत और पूजन विधि (Puja vidhi)

१. घर और पूजा स्थान की पूरी सफाई करें। प्रसाद बनाते समय शुद्धता का ध्यान रखें: नहाकर, स्वच्छ वस्त्र पहनकर। २. खरना के दिन व्रती दिन भर उपवास रखकर शाम को सूर्य और छठी मैया को गुड़ की खीर का भोग लगाती हैं और प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद निर्जल व्रत आरंभ होता है। ३. षष्ठी की शाम को व्रती परिवार के साथ घाट पर जाती हैं। सूप में ठेकुआ, फल और दीपक सजाया जाता है। ४. जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य की ओर मुख करके अर्घ्य दिया जाता है। दूध या जल की धार के साथ सूप को सूर्य की ओर उठाया जाता है। ५. रात को घर या घाट पर कोसी भरने (दीपक और गन्ने के घेरे में पूजा) की परंपरा कई घरों में है। ६. सप्तमी की सुबह उसी घाट पर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। ७. अर्घ्य के बाद छठी मैया से परिवार की रक्षा की प्रार्थना करके प्रसाद बाँटा जाता है और पारण किया जाता है।

कथाएँ और मान्यताएँ (Stories and beliefs)

• एक लोकप्रिय कथा के अनुसार राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी की संतान जन्म के समय जीवित नहीं बची। षष्ठी देवी की आराधना से संतान को जीवन मिला, और तब से षष्ठी देवी की पूजा प्रचलित मानी जाती है। • रामायण की परंपरा में कहा जाता है कि वनवास से लौटकर श्रीराम और माता सीता ने सूर्य देव की उपासना की। • महाभारत की परंपरा में कर्ण को सूर्य उपासक और द्रौपदी के सूर्य व्रत का उल्लेख भी लोक-परंपरा में मिलता है। इन कथाओं के रूप क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकते हैं।

मंत्र (Mantras)

• सूर्य अर्घ्य मंत्र: "ॐ एहि सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते। अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर॥" • "ॐ सूर्याय नमः" या "ॐ घृणिः सूर्याय नमः" • छठी मैया का स्मरण: "जय छठी मैया" मंत्रों के पूरे पाठ नीचे दिए गए लिंकों पर हैं।

क्या करें और क्या न करें (Do's and don'ts)

• पूरे पर्व में शुद्धता रखें। प्रसाद बनाते समय बिना नहाए रसोई में न जाएँ। • प्रसाद सात्विक रखें: बिना प्याज-लहसुन और बिना नमक का नहीं तो भी बहुत कम नमक का भोजन, मांस-मदिरा से पूर्ण दूरी। • घाट पर पानी की गहराई, फिसलन और भीड़ का ध्यान रखें। बच्चों और बुज़ुर्गों को सुरक्षित रखें, और पानी में अकेले न उतरें। • घाट और नदी तालाब साफ रखें। प्लास्टिक का प्रयोग न करें और पूजा के बाद कचरा न फैलाएँ। • बहुत कठिन निर्जल व्रत सबके लिए उचित नहीं। गर्भवती, बीमार या वृद्ध व्रती डॉक्टर की सलाह लें और जल सहित व्रत रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: छठ पूजा में क्या-क्या प्रसाद चढ़ता है? उत्तर: मुख्य रूप से ठेकुआ, चावल के लड्डू (कसार), गन्ना, नारियल, केला और मौसमी फल। खरना में गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनता है। प्रश्न: छठ का व्रत कितने घंटे का होता है? उत्तर: खरना के प्रसाद के बाद लगभग 36 घंटे का निर्जल व्रत रखा जाता है, जो सप्तमी की सुबह उषा अर्घ्य के बाद खुलता है। प्रश्न: क्या पुरुष भी छठ व्रत कर सकते हैं? उत्तर: हाँ। अधिकतर महिलाएँ व्रत रखती हैं, पर पुरुष भी श्रद्धा से व्रत रखते हैं। प्रश्न: अगर नदी या घाट न हो तो क्या करें? उत्तर: कई परिवार घर की छत, आँगन या साफ पानी की बड़ी टंकी में अर्घ्य की व्यवस्था करते हैं। मन की श्रद्धा और शुद्धता मुख्य हैं। प्रश्न: Chhath Puja arghya: when and how? उत्तर: Arghya is offered twice: to the setting sun on the evening of Shashthi and to the rising sun the next morning, standing in clean water with a soop (bamboo tray) holding thekua and fruits.

परंपराएँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। पूजा-विधि के लिए अपने पंडित या कुल-परंपरा की सलाह लें।