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गोवर्धन पूजा

Govardhan Puja
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📅 आगामी तिथियाँ (Upcoming dates)

10 नवंबर 2026, मंगलवार · गोवर्धन पूजा 18 दिन बाद
30 अक्टूबर 2027, शनिवार · गोवर्धन पूजा 372 दिन बाद

सटीक मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, आज का पंचांग देखें।

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गोवर्धन पूजा का महत्व (Why Govardhan Puja is celebrated)

गोवर्धन पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है। इसे अन्नकूट भी कहा जाता है। कथा के अनुसार ब्रजवासी हर वर्ष इंद्र देव की पूजा करते थे। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि हमारी गायों और खेती का पालन गोवर्धन पर्वत और प्रकृति से होता है, इसलिए पर्वत की पूजा करनी चाहिए। इससे इंद्र क्रोधित हुए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार वर्षा कर दी। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उँगली पर उठाकर समस्त ब्रजवासियों और गोधन की रक्षा की। सात दिन बाद इंद्र का अहंकार टूटा और उन्होंने क्षमा माँगी। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा है। यह पर्व प्रकृति, पर्वत और गोवंश के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है।

कब मनाई जाती है (When it falls)

गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होती है, जो प्रायः दीपावली के अगले दिन पड़ती है। तिथि के अनुसार कभी-कभी यह दीपावली के एक दिन बाद के बजाय अगले दिन भी आ सकती है। ऊपर दी गई कैलेंडर तारीख देखें और अपने शहर के पूजा समय के लिए पंचांग देखें।

पूजा सामग्री सूची (Samagri checklist)

• गाय का गोबर (गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाने के लिए) • रोली, चंदन, अक्षत, हल्दी, फूल, खील-बताशे • धूप, दीप, कपूर, घी • दूध, दही, शहद, गंगाजल • अन्नकूट के लिए चावल, कढ़ी, दाल, विभिन्न सब्ज़ियाँ, पूरी, मिठाइयाँ और फल • गायों के लिए चारा, गुड़ और रोटी

पूजन विधि (Puja vidhi)

१. प्रातः स्नान करके घर के आँगन या पूजा स्थान को स्वच्छ करें। २. गोबर से लेटे हुए पुरुष के रूप में गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ और उसे फूलों तथा खील-बताशों से सजाएँ। साथ में ग्वाल-बाल, गायें और पेड़-पौधे भी बनाए जाते हैं। ३. रोली, अक्षत, फूल, दीप और धूप से गोवर्धन जी का पूजन करें। ४. दूध, दही, शहद और अन्नकूट का भोग लगाएँ। ५. श्रीकृष्ण और गिरिराज की आरती करें और गोवर्धन की परिक्रमा करें। ६. गायों और बैलों को स्नान कराकर सजाएँ, गुड़ और चारा खिलाएँ और उनका पूजन करें। ७. अन्नकूट का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें।

अन्नकूट और छप्पन भोग (Annakut and 56 bhog)

अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पर्वत। इस दिन भगवान को अनेक प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। मथुरा, वृंदावन, नाथद्वारा और गोवर्धन के मंदिरों में छप्पन भोग की परंपरा प्रसिद्ध है। मान्यता है कि ब्रजवासियों ने सात दिन तक भूखे रहे श्रीकृष्ण को आठवें दिन तरह-तरह के व्यंजन अर्पित किए थे, इसी से छप्पन भोग की परंपरा चली। घर में भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार सात्विक भोजन का भोग लगाया जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1गोवर्धन पूजा 2026 में कब है?
गोवर्धन पूजा 10 नवंबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। सटीक पूजा मुहूर्त आपके शहर के अनुसार बदलता है, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।
2गोवर्धन पूजा कब की जाती है?
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को की जाती है, जो प्रायः दीपावली के अगले दिन आती है। सही तारीख के लिए ऊपर का कैलेंडर और अपने शहर का पंचांग देखें।
3गोवर्धन पूजा में क्या बनाया जाता है?
गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है और उसकी पूजा की जाती है। साथ में अन्नकूट के रूप में कई प्रकार के अन्न व्यंजन भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
4अन्नकूट का क्या अर्थ है?
अन्नकूट का अर्थ है अन्न का ढेर या पर्वत। इसमें चावल, कढ़ी, सब्ज़ियाँ, मिठाइयाँ आदि अनेक व्यंजन भगवान को भोग लगाए जाते हैं।
5गोवर्धन पूजा के दिन गायों की पूजा क्यों की जाती है?
गोवर्धन कथा में गोधन की रक्षा का विशेष महत्व है। इसलिए इस दिन गायों को स्नान कराकर सजाया जाता है और गुड़-चारा खिलाकर उनका पूजन किया जाता है।
6गोवर्धन पूजा और दीपावली में क्या संबंध है?
गोवर्धन पूजा पाँच दिवसीय दीपावली उत्सव का चौथा दिन है। क्रम इस प्रकार है: धनतेरस, छोटी दिवाली, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज।
7गोवर्धन पूजा पर परिक्रमा कैसे की जाती है?
घर में गोबर से बने गोवर्धन की परिक्रमा की जाती है, कई जगह जल की धारा छोड़ते हुए। ब्रज में गोवर्धन पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर की परिक्रमा प्रसिद्ध है।
8छप्पन भोग क्या है?
छप्पन भोग में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि श्रीकृष्ण दिन में आठ बार भोजन करते थे और सात दिन तक भोजन नहीं कर सके, इसलिए उन आठ प्रहर गुणा सात दिन के बदले 56 व्यंजन चढ़ाए गए।

परंपराएँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। पूजा-विधि के लिए अपने पंडित या कुल-परंपरा की सलाह लें।