ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये।
धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
अर्थ / लाभ
यक्षराज, वैश्रवण और धन-धान्य के अधिपति कुबेर को नमन; मुझे धन-धान्य की समृद्धि दें और दिलाएँ। परंपरा: धनतेरस और दीपावली पर लक्ष्मी-कुबेर पूजन में।
यक्षराज, वैश्रवण और धन-धान्य के अधिपति कुबेर को नमन; मुझे धन-धान्य की समृद्धि दें और दिलाएँ। परंपरा: धनतेरस और दीपावली पर लक्ष्मी-कुबेर पूजन में।