🔱 मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र

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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

अर्थ / लाभ
हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो सुगंध और पुष्टि के दाता हैं। जैसे पका हुआ खरबूजा बेल के बंधन से अपने आप छूट जाता है, वैसे ही हम मृत्यु के बंधन से मुक्त हों और अमरत्व (मोक्ष) से दूर न हों। परंपरा: रोग, भय और संकट में रक्षा की प्रार्थना के रूप में जप। (ऋग्वेद 7.59.12)