🔱 मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय

वक्रतुण्ड महाकाय

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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थ / लाभ
हे वक्रतुण्ड, विशाल देह वाले, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी गणपति देव, मेरे सभी कार्यों को सदा विघ्नरहित करें। परंपरा: किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में पढ़ा जाता है।