📖 व्रत कथा
वट सावित्री व्रत कथा

वट सावित्री व्रत कथा

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पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)

भाग १: सावित्री और सत्यवान

मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने वन में रहने वाले राजकुमार सत्यवान को पति चुना, यद्यपि नारद ने कहा था कि वह एक वर्ष में मरेगा।

भाग २: वट के नीचे

निर्धारित दिन सत्यवान लकड़ी काटते हुए गिर पड़े। सावित्री उनका सिर गोद में रखकर वट वृक्ष के नीचे बैठीं। यमराज उनके प्राण लेकर चले।

भाग ३: यमराज से संवाद

सावित्री यमराज के पीछे चलती रहीं। उनकी बुद्धिमान बातों से प्रसन्न होकर यमराज ने वर दिए: ससुर की दृष्टि, राज्य और अंत में सौ पुत्रों का वर।

भाग ४: पति की वापसी

पुत्रों के वर के कारण सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े। सावित्री पति को जीवित पाकर लौटीं। तभी से वट सावित्री व्रत की परंपरा है।

इति वट सावित्री व्रत कथा संपूर्ण