📖 व्रत कथा
सफला एकादशी व्रत कथा

सफला एकादशी व्रत कथा

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पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)

भाग १: राजा का पुत्र लुंपक

राजा महिष्मत का पुत्र लुंपक दुराचारी हो गया और राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया। वह वन में एक पीपल के पास रहने लगा।

भाग २: एकादशी की रात

पौष कृष्ण एकादशी की ठंडी रात में वह भूख-सर्दी से व्याकुल होकर जागता रहा और जो फल मिले, भगवान को अर्पित कर दिए। अनजाने में उससे व्रत हो गया।

भाग ३: परिवर्तन

उसके मन में पश्चाताप जागा। कथा के अनुसार पिता ने उसे वापस बुला लिया और वह धर्म के मार्ग पर चलकर सफल राजा बना।

इति सफला एकादशी व्रत कथा संपूर्ण