📖 व्रत कथा
पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

अपनों के साथ शेयर करें
WhatsApp Facebook X Telegram

📅 व्रत कैलेंडर में तिथि देखें  ·  🎉 त्योहार कैलेंडर

पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)

भाग १: निःसंतान राजा

भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या के कोई संतान नहीं थी। इस चिंता से राजा का मन राजकाज में भी नहीं लगता था।

भाग २: मुनियों का उपदेश

वन में घूमते हुए राजा मानसरोवर के पास मुनियों के आश्रम पहुँचे। मुनियों ने कहा कि आज श्रावण शुक्ल पुत्रदा एकादशी है, इसका व्रत करो।

भाग ३: संतान की प्राप्ति

राजा-रानी ने श्रद्धा से व्रत किया। कथा के अनुसार उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई और राज्य में खुशहाली आई। तभी से यह व्रत संतान की कामना से किया जाता है।

इति पुत्रदा एकादशी व्रत कथा संपूर्ण