📖 व्रत कथा
मंगला गौरी व्रत कथा

मंगला गौरी व्रत कथा

अपनों के साथ शेयर करें
WhatsApp Facebook X Telegram

📅 व्रत कैलेंडर में तिथि देखें  ·  🎉 त्योहार कैलेंडर

पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)

भाग १: निःसंतान सेठ-सेठानी

कथा है कि एक नगर में धर्मपाल नामक सेठ और उसकी पत्नी निःसंतान थे। वे गौरी जी की उपासना करते थे।

भाग २: वरदान और शाप

देवी ने पुत्र का वरदान दिया, पर कहा कि वह सोलह वर्ष की आयु में कष्ट पाएगा। पुत्र बड़ा हुआ और उसका विवाह एक ऐसी कन्या से हुआ जिसकी माता मंगला गौरी का व्रत करती थी।

भाग ३: व्रत का प्रभाव

कथा के अनुसार उस कन्या के व्रत के प्रभाव से पति का संकट टल गया और वह दीर्घायु हुआ। तभी से मंगला गौरी व्रत की परंपरा मानी जाती है।

इति मंगला गौरी व्रत कथा संपूर्ण