📖 व्रत कथा
कामदा एकादशी व्रत कथा

कामदा एकादशी व्रत कथा

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पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)

भाग १: भोगीपुर नगर

प्राचीन काल में भोगीपुर नगर में राजा पुंडरीक राज्य करते थे। उनके दरबार में ललित नामक गंधर्व और उसकी पत्नी ललिता रहते थे, जिनमें अत्यंत प्रेम था।

भाग २: शाप

एक बार दरबार में गाते समय ललित का ध्यान पत्नी की ओर चला गया और सुर बिगड़ गया। राजा ने क्रोध में उसे राक्षस बन जाने का शाप दिया। वह भयानक रूप में जंगलों में भटकने लगा।

भाग ३: मुक्ति

पति के दुःख से ललिता श्रृंगी ऋषि के पास पहुँची। ऋषि ने चैत्र शुक्ल एकादशी का व्रत करने को कहा। ललिता ने व्रत किया और पुण्य पति को अर्पित किया। ललित शाप से मुक्त हो गया। तभी से कामदा एकादशी का महत्व माना जाता है।

इति कामदा एकादशी कथा संपूर्ण