📖 व्रत कथा
जया एकादशी व्रत कथा

जया एकादशी व्रत कथा

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पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)

भाग १: माल्यवान और पुष्पवती

इंद्र की सभा में गंधर्व माल्यवान और अप्सरा पुष्पवती गायन-नृत्य कर रहे थे। दोनों एक-दूसरे में मोहित होकर ताल-सुर भूल गए।

भाग २: इंद्र का शाप

क्रोधित होकर इंद्र ने उन्हें पिशाच योनि में जाने का शाप दिया। वे हिमालय पर कष्ट में रहने लगे।

भाग ३: अनजाने में व्रत

माघ शुक्ल एकादशी को अनजाने में उनसे उपवास और जागरण हो गया। इस पुण्य से वे शाप से मुक्त होकर स्वर्ग लौटे। भगवान विष्णु ने कहा कि जो इस व्रत को श्रद्धा से करता है, उसे भय से मुक्ति मिलती है।

इति जया एकादशी व्रत कथा संपूर्ण