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पारंपरिक कथा (पुनर्कथन)
भाग १: इंद्र पूजा और कृष्ण का प्रश्न
द्वापर युग में गोकुल के लोग हर वर्ष वर्षा के लिए इंद्र की पूजा की तैयारी करते थे। बालक कृष्ण ने नंद बाबा से पूछा, "हम यह पूजा क्यों करते हैं?" नंद जी ने कहा कि इंद्र वर्षा देते हैं। कृष्ण ने कहा, "हमारी गायों को चारा गोवर्धन पर्वत से मिलता है। हमें उसी की पूजा करनी चाहिए।"
भाग २: इंद्र का क्रोध
ब्रजवासियों ने कृष्ण की बात मानकर गोवर्धन की पूजा की और अन्नकूट अर्पित किया। यह जानकर इंद्र बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने ब्रज पर मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी।
भाग ३: गोवर्धन धारण
सब लोग भयभीत होकर कृष्ण के पास आए। कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया और सबको उसके नीचे आश्रय दिया। सात दिन तक वर्षा होती रही, पर कोई कष्ट न पाया।
भाग ४: इंद्र का पश्चाताप
इंद्र ने अंत में अपनी भूल समझी, कृष्ण के चरणों में आए और क्षमा माँगी। कामधेनु ने भी कृष्ण का अभिषेक किया। तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा चली।
इति गोवर्धन पूजा कथा संपूर्ण