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संत तुकाराम और कर्ज़ की बही (Sant Tukaram and the Debt Ledger)

संत तुकाराम की प्रसिद्ध लोककथा, जिसमें उन्होंने गरीबों के कर्ज़ की बही नदी में बहा दी।

📿 संत-भक्त कथाएँ ⏱ 3 मिनट

संत तुकाराम महाराष्ट्र के देहू गाँव के वारकरी संत थे। कहा जाता है कि वे पहले छोटा सा व्यापार और साहूकारी करते थे। आगे चलकर उनका मन पूरी तरह विट्ठल भक्ति में लग गया।

लोक परंपरा के अनुसार उनके पास गाँव के गरीब लोगों को दिए कर्ज़ की बही थी। अकाल के समय अनेक लोग वह कर्ज़ चुकाने में असमर्थ थे और उन पर बोझ बना रहता था।

तुकाराम ने सोचा कि मेरी भक्ति में यह बही बाधा है। उन्होंने सारी बही इंद्रायणी नदी में डुबो दी और लोगों से कह दिया कि अब तुम पर कोई ऋण नहीं है।

इसके बाद वे अपना समय अभंग रचने और कीर्तन में बिताने लगे। उनके अभंग आज भी महाराष्ट्र में बड़े प्रेम से गाए जाते हैं।

🪔 सीख
धन से बड़ा मानवता का बंधन है। दूसरों के कष्ट को समझना और उन्हें राहत देना सच्ची भक्ति का हिस्सा है।

यह प्रसंग लोक परंपरा में प्रचलित है। विवरण स्रोतों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुकाराम जी किस परंपरा के संत थे?
वारकरी परंपरा के, जो पंढरपुर के विट्ठल की भक्ति से जुड़ी है।
अभंग क्या है?
मराठी संतों द्वारा रचा गया भक्ति-काव्य का एक छंद।
क्या यह प्रसंग ऐतिहासिक है?
यह जनश्रुति में प्रचलित है और ब्योरे अलग-अलग मिलते हैं।

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