संत नामदेव महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत थे और विट्ठल भगवान के अनन्य भक्त थे। कहा जाता है कि वे हर जीव में प्रभु को देखते थे।
एक दिन वे घर में रोटियाँ बनाकर भोजन के लिए बैठे ही थे कि एक कुत्ता आया और रोटी लेकर भाग गया। नामदेव जी उसके पीछे घी का कटोरा लेकर दौड़ पड़े और पुकारने लगे, "प्रभु, रूखी रोटी मत खाइए, इसमें घी लगा देता हूँ।"
यह दृश्य देखकर लोग हैरान रह गए। कुत्ता रुक गया और रोटी पर घी लगवाने दिया। लोक कथा में कहा जाता है कि उस रूप में नामदेव जी को प्रभु के दर्शन हुए।
यह प्रसंग सिखाता है कि जब मन में सबके प्रति आदर और करुणा हो तो हर प्राणी में ईश्वर का दर्शन होता है।