होम › कहानियाँ › तुलसीदास जी और हनुमान जी का दर्शन
📖

तुलसीदास जी और हनुमान जी का दर्शन (Tulsidas and Hanuman Ji)

रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास को हनुमान जी के दर्शन की लोक परंपरा की कथा।

📿 संत-भक्त कथाएँ ⏱ 4 मिनट

गोस्वामी तुलसीदास भक्तिकाल के महान कवि थे, जिन्होंने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की। परंपरा में उनके बचपन और जीवन के कई प्रसंग कहे जाते हैं।

लोक कथाओं के अनुसार वे श्रीराम के दर्शन के लिए व्याकुल थे। काशी में एक प्रेत ने उन्हें बताया कि हनुमान जी रोज़ रामकथा सुनने एक वृद्ध कोढ़ी के रूप में आते हैं और सबसे अंत तक बैठे रहते हैं।

तुलसीदास जी ने कथा के बाद उस वृद्ध के चरण पकड़ लिए। कहा जाता है कि उनके निश्चय से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने अपना असली रूप दिखाया और चित्रकूट में श्रीराम के दर्शन का मार्ग बताया।

चित्रकूट के घाट पर तुलसीदास जी ने तिलक लगाते श्रीराम को देखा, ऐसी परंपरा है। इसी प्रसंग को दोहे में याद किया जाता है: "चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर। तुलसीदास चंदन घिसें, तिलक करें रघुबीर।"

🪔 सीख
श्रद्धा और दृढ़ता से कठिन से कठिन साधना सफल होती है। सत्संग और कथा-श्रवण का महत्व कभी कम नहीं होता।

यह कथा भक्त-परंपरा में प्रचलित है। तुलसीदास जी के जीवन के विवरण स्रोतों के अनुसार भिन्न मिलते हैं।

संबंधित आरती, कथा और पाठ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामचरितमानस किस भाषा में लिखी गई?
अवधी भाषा में।
तुलसीदास किस काल में हुए?
सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी के आसपास का काल माना जाता है।
क्या यह कथा प्रमाणित इतिहास है?
नहीं, यह भक्त-परंपरा में कही जाने वाली कथा है।

इसी श्रेणी की और कहानियाँ