होम › कहानियाँ › संत जनाबाई और विट्ठल की कृपा
🌾

संत जनाबाई और विट्ठल की कृपा (Sant Janabai and Vitthal)

चक्की पीसते हुए भी विट्ठल का नाम गाने वाली संत जनाबाई की लोककथा, जो काम में भक्ति का भाव सिखाती है।

📿 संत-भक्त कथाएँ ⏱ 3 मिनट

जनाबाई महाराष्ट्र की संत कवयित्री थीं और संत नामदेव के घर में सेवा करती थीं। उनका जीवन सादा था, पर मन हर समय विट्ठल के नाम में रमा रहता था।

घर के काम करते समय, चक्की चलाते हुए और झाड़ू लगाते हुए वे विट्ठल के अभंग गुनगुनाती रहती थीं। उनकी रचनाओं में रोज़मर्रा के कामों का सुंदर वर्णन मिलता है।

लोक कथा कहती है कि जनाबाई की भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं विट्ठल उनके साथ चक्की पीसने बैठ जाते थे। इस कथा का भाव यही है कि जो काम को भक्ति के साथ करता है, ईश्वर उसके साथ होता है।

आज भी जनाबाई के अभंग महाराष्ट्र में बड़े आदर से गाए जाते हैं।

🪔 सीख
साधारण काम भी भक्ति के भाव से करने पर पूजा बन जाता है। ईश्वर किसी बड़े स्थान या ऊँचे पद का मोहताज नहीं।

यह कथा भक्त-परंपरा में प्रचलित है। विवरण स्रोतों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनाबाई कौन थीं?
महाराष्ट्र की संत कवयित्री, जो संत नामदेव के घर से जुड़ी थीं।
उनकी रचनाएँ किस रूप में हैं?
मराठी अभंग के रूप में।
चक्की वाला प्रसंग क्या है?
लोक कथा, जिसमें भक्ति से काम करने का भाव दर्शाया गया है।

इसी श्रेणी की और कहानियाँ