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प्यासा कौआ (The Thirsty Crow)

कंकड़ डालकर घड़े का पानी ऊपर लाने वाले प्यासे कौए की कहानी, जो सूझबूझ और धैर्य की सीख देती है।

गर्मी के दिनों में एक कौआ पानी की तलाश में दूर-दूर तक उड़ता रहा, पर कहीं पानी नहीं मिला। प्यास से उसका गला सूख गया और पंखों में जान नहीं बची।

थककर वह एक घर के आँगन में उतरा। वहाँ एक घड़ा रखा था। कौए ने झाँककर देखा तो घड़े में थोड़ा सा पानी था, पर वह इतना नीचे था कि उसकी चोंच वहाँ तक नहीं पहुँचती थी।

कौआ सोचने लगा कि अब क्या करूँ। उसने घड़ा गिराने की कोशिश की, पर वह भारी था। फिर उसकी नज़र पास पड़े छोटे-छोटे कंकड़ों पर पड़ी।

उसके मन में एक विचार आया। उसने एक-एक कंकड़ चोंच में उठाकर घड़े में डालना शुरू किया। हर कंकड़ के साथ पानी थोड़ा-थोड़ा ऊपर आने लगा।

कुछ देर में पानी घड़े के मुँह तक आ गया। कौए ने पेट भरकर पानी पिया और अपनी सूझबूझ पर खुश होकर उड़ गया।

🪔 सीख
मुसीबत में घबराने के बजाय सोच-समझकर उपाय खोजें। जहाँ चाह होती है, वहाँ राह भी निकलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस कहानी की सीख क्या है?
धैर्य और बुद्धि से कठिन समस्या भी हल हो जाती है।
यह कहानी कहाँ से ली गई है?
यह ईसप की प्रसिद्ध कहानियों में मिलती है और भारत में बच्चों के पाठ्यक्रम में लोकप्रिय है। यहाँ अपने शब्दों में लिखी गई है।
किस उम्र के बच्चों के लिए है?
चार से दस वर्ष के बच्चों के लिए।

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