एक जंगल के तालाब के पास एक कौआ, एक चूहा, एक कछुआ और एक हिरण रहते थे। चारों में गहरी दोस्ती थी। वे रोज़ मिलते, बातें करते और एक-दूसरे का ध्यान रखते।
एक दिन हिरण शिकारी के जाल में फँस गया। उसकी पुकार सुनकर बाकी तीनों मित्र उसकी मदद के लिए दौड़े आए।
चूहे ने अपने तेज़ दाँतों से जाल की रस्सियाँ कुतर दीं और हिरण आज़ाद होकर भाग गया। कौआ पेड़ पर बैठकर पहरा दे रहा था। तभी कछुआ भी धीरे-धीरे मित्रों को ढूँढता हुआ वहाँ पहुँच गया, और शिकारी ने उसे पकड़कर थैले में डाल लिया।
चूहा और कौआ घबरा गए। तब कौए ने तरकीब सोची। हिरण दूर जाकर शिकारी के सामने ऐसे लेट गया जैसे मर गया हो, और कौआ उसके ऊपर बैठकर चोंच मारने का नाटक करने लगा।
शिकारी ने सोचा कि हिरण मर गया है। वह थैला रखकर हिरण को उठाने दौड़ा। उसी पल चूहे ने थैला कुतरकर कछुए को आज़ाद कर दिया और कछुआ तालाब में चला गया। हिरण भी झट से उठकर भाग गया। शिकारी खाली हाथ रह गया और चारों दोस्त सुरक्षित थे।