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बंदर और मगरमच्छ (The Monkey and the Crocodile)

नदी किनारे रहने वाले बंदर की चतुराई और मगरमच्छ की दोस्ती की कहानी, जो बुद्धिमानी से संकट टालना सिखाती है।

नदी किनारे जामुन के पेड़ पर एक बंदर रहता था। वह रोज़ मीठे जामुन खाता। एक दिन एक मगरमच्छ उधर आया और बंदर ने उसे भी जामुन खिलाए। दोनों में दोस्ती हो गई।

मगरमच्छ रोज़ आता, जामुन खाता और कुछ अपनी पत्नी के लिए ले जाता। उसकी पत्नी को जामुन बहुत पसंद आए। उसने सोचा, "जो रोज़ ऐसे मीठे फल खाता है, उसका कलेजा कितना मीठा होगा!" और पति से बंदर का कलेजा लाने की ज़िद की।

मगरमच्छ बहुत दुखी हुआ, पर पत्नी की ज़िद के आगे झुक गया। उसने बंदर से कहा, "दोस्त, मेरी पत्नी तुमसे मिलना चाहती है। मेरी पीठ पर बैठ जाओ, मैं तुम्हें घर ले चलता हूँ।"

बीच नदी में पहुँचकर मगरमच्छ ने सच बता दिया। बंदर घबराया नहीं। उसने चतुराई से कहा, "अरे दोस्त, तुमने पहले क्यों नहीं बताया? मेरा कलेजा तो पेड़ पर रखा है। मुझे वापस ले चलो, मैं उसे लेकर आता हूँ।"

मगरमच्छ बंदर को किनारे ले आया। बंदर झट से पेड़ पर चढ़ गया और बोला, "मूर्ख, कलेजा कभी शरीर से अलग रहता है क्या? जो दोस्त के साथ धोखा करता है, उससे दोस्ती नहीं रखी जाती।" इस तरह बंदर की जान बच गई।

🪔 सीख
संकट में घबराएँ नहीं, बुद्धि से काम लें। धोखा देने वाले का भरोसा नहीं करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह कहानी कहाँ मिलती है?
यह पंचतंत्र की प्रसिद्ध कथाओं में से एक है।
बंदर ने जान कैसे बचाई?
उसने मगरमच्छ को अपनी चतुराई से यकीन दिलाया कि कलेजा पेड़ पर है।
इससे बच्चों को क्या सीख मिलती है?
धैर्य, सतर्कता और सही समय पर सोच-समझकर बोलना।

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