एक तालाब में एक कछुआ रहता था। वह बहुत बातूनी था और हर समय बोलता रहता था। दो हंस उसके अच्छे मित्र थे।
एक साल बारिश नहीं हुई और तालाब सूखने लगा। हंस दूसरी जगह जाने की सोचने लगे। कछुआ बोला, "मुझे भी साथ ले चलो, यहाँ मैं मर जाऊँगा।"
हंसों ने कहा, "हम तुम्हें ले जा सकते हैं, पर एक शर्त है। हम एक लकड़ी का डंडा पकड़ेंगे और तुम बीच से अपने मुँह में उसे पकड़ लोगे। रास्ते में कुछ भी हो जाए, तुम बिल्कुल मत बोलना।" कछुए ने वादा किया।
हंस उड़ चले। नीचे गाँव के लोग यह अनोखा दृश्य देखकर हँसने लगे और कहने लगे, "देखो, हंस कछुए को ले जा रहे हैं!"
कछुए से रहा नहीं गया। वह बोलने के लिए जैसे ही मुँह खोलता है, डंडा छूट जाता है और वह नीचे गिर पड़ता है। इस तरह उसकी बातूनी आदत उसकी हानि का कारण बनी।