होम › कहानियाँ › नीला सियार
🦊

नीला सियार (The Blue Jackal)

रंग से बने झूठे राजा की कहानी, जो बताती है कि दिखावा ज़्यादा देर नहीं टिकता। पंचतंत्र की लोकप्रिय कथा का पुनर्कथन।

एक जंगल में एक सियार रहता था। एक दिन भोजन की तलाश में वह गाँव में पहुँचा तो कुत्ते उसके पीछे पड़ गए। जान बचाने के लिए वह एक धोबी के नील के बर्तन में कूद पड़ा।

जब बाहर निकला तो उसका पूरा शरीर नीला हो चुका था। जंगल के जानवरों ने ऐसा रंग पहले कभी नहीं देखा था। सब उसे देखकर डर गए।

सियार ने मौका पहचान लिया और बोला, "मैं ब्रह्मा जी द्वारा भेजा गया जंगल का राजा हूँ।" भोले जानवरों ने उसे राजा मान लिया और उसकी सेवा करने लगे। वह शेर, बाघ और हाथी पर हुक्म चलाने लगा।

कुछ समय बाद उसे अपने साथी सियारों से अलग रहना खलने लगा। एक रात चाँदनी में कई सियार ज़ोर से हुआ-हुआ करने लगे। नीला सियार अपनी आदत से मजबूर होकर वह भी ज़ोर से हुआ-हुआ करने लगा।

सब जानवर समझ गए कि यह तो एक साधारण सियार है, जो रंग लगाकर उन्हें ठग रहा था। उन्होंने उसे जंगल से खदेड़ दिया।

🪔 सीख
झूठ और दिखावा ज़्यादा देर नहीं टिकता। अपनी असलियत को छुपाने के बजाय अपने गुणों पर भरोसा रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह कहानी किस पुस्तक से है?
पंचतंत्र की कथाओं में इसका उल्लेख मिलता है।
नीला सियार पकड़ा कैसे गया?
चाँदनी रात में अन्य सियारों की आवाज़ सुनकर उसने भी हुआ-हुआ कर दी।
बच्चे क्या सीखें?
सच्चाई और अपनी असलियत पर गर्व।

इसी श्रेणी की और कहानियाँ