एक खरगोश को अपनी तेज़ चाल पर बहुत घमंड था। वह अक्सर कछुए की धीमी चाल का मज़ाक उड़ाता था।
एक दिन कछुए ने कहा, "चलो, दौड़ लगाते हैं।" खरगोश हँस पड़ा, पर दौड़ के लिए तैयार हो गया। जंगल के सभी जानवर देखने इकट्ठा हुए।
दौड़ शुरू हुई। खरगोश बहुत आगे निकल गया। उसने सोचा कि कछुआ तो बहुत पीछे है, थोड़ा आराम कर लेता हूँ, और एक पेड़ के नीचे लेट गया। थोड़ी देर में उसे गहरी नींद आ गई।
कछुआ बिना रुके धीरे-धीरे चलता रहा। जब खरगोश की आँख खुली तो उसने देखा कि कछुआ लगभग अंतिम रेखा पर है। वह पूरी ताकत से दौड़ा, पर तब तक कछुआ रेखा पार कर चुका था।
सब जानवरों ने कछुए की जीत पर तालियाँ बजाईं और खरगोश शर्मिंदा होकर सिर झुकाए खड़ा रहा।