एक भूखी लोमड़ी जंगल में घूम रही थी। तभी उसकी नज़र एक बेल पर लटके अंगूरों के गुच्छों पर पड़ी। अंगूर रसीले और पके दिख रहे थे।
लोमड़ी ने छलांग लगाई, पर अंगूर बहुत ऊँचे थे। उसने फिर कोशिश की, फिर भी हाथ न आए। कई बार कूदने पर भी जब वह असफल रही तो थककर बैठ गई।
वह इधर-उधर देखने लगी कि कोई उसे देख तो नहीं रहा। फिर मुँह बनाकर बोली, "ये अंगूर तो खट्टे हैं। इन्हें कौन खाए!" और वहाँ से चली गई।