एक गरीब किसान के पास एक मुर्गी थी। एक सुबह उसने देखा कि मुर्गी ने सोने का अंडा दिया है। वह चकित रह गया। उसने वह अंडा बाज़ार में बेचा और उसे अच्छे पैसे मिले।
अब मुर्गी हर रोज़ एक सोने का अंडा देने लगी। कुछ ही दिनों में किसान खुशहाल हो गया। पर जैसे-जैसे उसके पास धन बढ़ा, उसका लालच भी बढ़ता गया।
एक दिन उसने सोचा, "रोज़ एक अंडे के लिए इंतज़ार क्यों करूँ? इसके पेट में ज़रूर ढेर सारे सोने के अंडे होंगे। क्यों न सब एक साथ निकाल लूँ?"
उसने मुर्गी को काट दिया, पर उसके पेट में कुछ नहीं निकला। न अंडे मिले, न मुर्गी रही। किसान सिर पकड़कर रोने लगा, पर अब कुछ नहीं हो सकता था।