एक वन में कबूतरों का झुंड रहता था, जिसका राजा चित्रग्रीव नाम का समझदार कबूतर था। एक दिन झुंड ने नीचे बिखरे दाने देखे और सब उन पर टूट पड़े।
चित्रग्रीव ने चेताया कि निर्जन वन में दाने कहाँ से आए, पर भूखे कबूतर नहीं माने। वे जैसे ही नीचे उतरे, एक शिकारी के बिछाए जाल में फँस गए।
चित्रग्रीव ने शांत रहकर कहा, "घबराओ मत। अगर हम सब एक साथ उड़ें तो जाल को ही लेकर उड़ सकते हैं।" सब कबूतरों ने एक साथ ज़ोर लगाया और जाल सहित आकाश में उड़ गए।
वे अपने मित्र चूहे हिरण्यक के बिल के पास पहुँचे। हिरण्यक ने अपने तेज़ दाँतों से एक-एक करके सबके बंधन काट दिए और सब कबूतर मुक्त हो गए।
शिकारी खाली हाथ लौट गया। कबूतरों ने समझ लिया कि मिलकर साथ चलने में कितनी शक्ति है।