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कबूतर और जाल: एकता की शक्ति (The Pigeons and the Net)

पंचतंत्र की कथा, जिसमें कबूतरों ने मिलकर जाल सहित उड़ान भरी और मित्र चूहे की मदद से मुक्त हुए।

एक वन में कबूतरों का झुंड रहता था, जिसका राजा चित्रग्रीव नाम का समझदार कबूतर था। एक दिन झुंड ने नीचे बिखरे दाने देखे और सब उन पर टूट पड़े।

चित्रग्रीव ने चेताया कि निर्जन वन में दाने कहाँ से आए, पर भूखे कबूतर नहीं माने। वे जैसे ही नीचे उतरे, एक शिकारी के बिछाए जाल में फँस गए।

चित्रग्रीव ने शांत रहकर कहा, "घबराओ मत। अगर हम सब एक साथ उड़ें तो जाल को ही लेकर उड़ सकते हैं।" सब कबूतरों ने एक साथ ज़ोर लगाया और जाल सहित आकाश में उड़ गए।

वे अपने मित्र चूहे हिरण्यक के बिल के पास पहुँचे। हिरण्यक ने अपने तेज़ दाँतों से एक-एक करके सबके बंधन काट दिए और सब कबूतर मुक्त हो गए।

शिकारी खाली हाथ लौट गया। कबूतरों ने समझ लिया कि मिलकर साथ चलने में कितनी शक्ति है।

🪔 सीख
एकता में बल है। संकट में घबराने के बजाय मिलकर उपाय खोजें और सच्चे मित्र को याद रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह कहानी कहाँ से है?
पंचतंत्र के मित्रलाभ भाग की प्रसिद्ध कथा है। यहाँ अपने शब्दों में सुनाई गई है।
कबूतरों के राजा का नाम क्या था?
पंचतंत्र में उसे चित्रग्रीव कहा गया है।
कहानी का संदेश क्या है?
एकता, धैर्य और सच्ची मित्रता।

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