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चिड़िया और बंदर (The Sparrow and the Monkeys)

पंचतंत्र की कथा, जो बताती है कि सलाह उसी को दें जो सुनना जानता हो।

एक घने पेड़ पर चिड़िया का सुंदर घोंसला था। बारिश के दिन थे। उसी पेड़ के नीचे कुछ बंदर भीगते हुए ठंड से काँप रहे थे।

चिड़िया ने उन्हें देखकर कहा, "भाइयो, तुम्हारे हाथ-पैर हैं, तुम भी अपने लिए छोटा सा घर बना सकते हो। मैं तो छोटी हूँ, फिर भी तिनके जोड़कर घोंसला बना लेती हूँ।"

बंदरों को यह बात चुभ गई। उन्होंने कहा, "यह छोटी सी चिड़िया हमें सिखाएगी!" और गुस्से में पेड़ पर चढ़कर उसका घोंसला नोचकर तोड़ दिया।

चिड़िया का घर बिखर गया और वह दुखी होकर सोचने लगी कि मैंने सलाह किसे दी।

🪔 सीख
सलाह उसी को दें जो उसे समझने और अपनाने को तैयार हो। हर किसी को उपदेश देना हानिकारक भी हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यह पंचतंत्र की कहानी है?
हाँ, यह पंचतंत्र की लोकप्रिय कथाओं में गिनी जाती है। यहाँ अपने शब्दों में सुनाई गई है।
कहानी से क्या सीख मिलती है?
सोच-समझकर सलाह दें और दूसरों की सलाह को विनम्रता से सुनें।
किस उम्र के लिए है?
सात वर्ष और उससे बड़े बच्चों के लिए।

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