एक कौए को कहीं से रोटी का टुकड़ा मिल गया। वह उसे चोंच में दबाकर एक पेड़ की डाल पर जा बैठा, ताकि आराम से खा सके।
नीचे से गुज़रती एक लोमड़ी की नज़र रोटी पर पड़ी। उसके मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा कि कोई तरकीब लगानी होगी।
लोमड़ी बोली, "कौए भाई, तुम कितने सुंदर हो! सुना है तुम्हारी आवाज़ भी बहुत मीठी है। ज़रा एक गीत तो सुनाओ।"
अपनी तारीफ़ सुनकर कौआ फूल गया। उसने गाने के लिए जैसे ही चोंच खोली, रोटी नीचे गिर गई। लोमड़ी ने झट से रोटी उठाई और भाग गई।
कौआ पछताता रह गया कि मैं झूठी तारीफ़ में क्यों आ गया।