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चालाक लोमड़ी और कौआ (The Fox and the Crow)

झूठी प्रशंसा में आकर रोटी गँवाने वाले कौए की कहानी, जो चापलूसी से सावधान रहना सिखाती है।

एक कौए को कहीं से रोटी का टुकड़ा मिल गया। वह उसे चोंच में दबाकर एक पेड़ की डाल पर जा बैठा, ताकि आराम से खा सके।

नीचे से गुज़रती एक लोमड़ी की नज़र रोटी पर पड़ी। उसके मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा कि कोई तरकीब लगानी होगी।

लोमड़ी बोली, "कौए भाई, तुम कितने सुंदर हो! सुना है तुम्हारी आवाज़ भी बहुत मीठी है। ज़रा एक गीत तो सुनाओ।"

अपनी तारीफ़ सुनकर कौआ फूल गया। उसने गाने के लिए जैसे ही चोंच खोली, रोटी नीचे गिर गई। लोमड़ी ने झट से रोटी उठाई और भाग गई।

कौआ पछताता रह गया कि मैं झूठी तारीफ़ में क्यों आ गया।

🪔 सीख
चापलूसी करने वालों से सावधान रहें। मीठी बातों के पीछे अक्सर स्वार्थ छिपा होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस कहानी की सीख क्या है?
झूठी प्रशंसा में न आएँ और सोच-समझकर निर्णय लें।
यह कहानी कहाँ की है?
यह ईसप की प्रसिद्ध कहानी है। यहाँ अपने शब्दों में सुनाई गई है।
किस उम्र के बच्चों के लिए है?
चार से दस वर्ष के बच्चों के लिए।

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