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संत एकनाथ और प्यासे गधे की सेवा (Sant Eknath and the Thirsty Donkey)

संत एकनाथ महाराज की प्रसिद्ध कथा, जिसमें उन्होंने प्यासे गधे को गंगाजल पिलाकर हर प्राणी में ईश्वर को देखा।

📿 संत-भक्त कथाएँ ⏱ 3 मिनट

संत एकनाथ महाराष्ट्र के पैठण के प्रसिद्ध संत थे। लोककथा है कि एक बार कुछ यात्री काशी से गंगाजल लेकर रामेश्वरम में शिवलिंग पर चढ़ाने जा रहे थे। उनके साथ गंगाजल के घड़े थे।

रास्ते में वे पैठण पहुँचे, जहाँ एकनाथ जी का आश्रम था। उन्होंने देखा कि एक गधा तेज़ धूप में प्यास से तड़प रहा है और अब चल भी नहीं पा रहा।

एकनाथ जी ने यात्रियों से गंगाजल का एक घड़ा माँगा और गधे को पिला दिया। यात्री नाराज़ हो गए, "यह जल तो रामेश्वर के लिए था!"

एकनाथ जी शांत भाव से बोले, "रामेश्वर तो हर प्राणी में हैं। जिसे प्यास लगी है, उसे जल पिलाना भी उन्हीं की पूजा है।" कहा जाता है कि यह सुनकर यात्रियों को अपनी भूल का अहसास हुआ और वे विनम्र हो गए।

🪔 सीख
हर जीव में ईश्वर का अंश देखें। किसी की प्यास बुझाना या भूख मिटाना सबसे सच्ची पूजा है।

यह कथा भक्त-परंपरा में प्रचलित है। विवरण स्रोतों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकनाथ जी किस प्रदेश के संत थे?
महाराष्ट्र के, जिनका संबंध पैठण से माना जाता है।
यह कथा क्या सिखाती है?
करुणा और जीव-सेवा।
क्या यह कथा भी लोककथा है?
हाँ, यह भक्त-परंपरा में सुनाई जाने वाली कथा है।

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