संत एकनाथ महाराष्ट्र के पैठण के प्रसिद्ध संत थे। लोककथा है कि एक बार कुछ यात्री काशी से गंगाजल लेकर रामेश्वरम में शिवलिंग पर चढ़ाने जा रहे थे। उनके साथ गंगाजल के घड़े थे।
रास्ते में वे पैठण पहुँचे, जहाँ एकनाथ जी का आश्रम था। उन्होंने देखा कि एक गधा तेज़ धूप में प्यास से तड़प रहा है और अब चल भी नहीं पा रहा।
एकनाथ जी ने यात्रियों से गंगाजल का एक घड़ा माँगा और गधे को पिला दिया। यात्री नाराज़ हो गए, "यह जल तो रामेश्वर के लिए था!"
एकनाथ जी शांत भाव से बोले, "रामेश्वर तो हर प्राणी में हैं। जिसे प्यास लगी है, उसे जल पिलाना भी उन्हीं की पूजा है।" कहा जाता है कि यह सुनकर यात्रियों को अपनी भूल का अहसास हुआ और वे विनम्र हो गए।