नवग्रह स्तोत्र (वेदव्यास)
हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्॥
अर्थ / लाभ
हिम, कुंद पुष्प और कमलनाल जैसे श्वेत, दैत्यों के परम गुरु और सब शास्त्रों के वक्ता भार्गव (शुक्र) को मैं प्रणाम करता हूँ। परंपरा: शुक्रवार को शुक्र ग्रह की शांति के लिए।
हिम, कुंद पुष्प और कमलनाल जैसे श्वेत, दैत्यों के परम गुरु और सब शास्त्रों के वक्ता भार्गव (शुक्र) को मैं प्रणाम करता हूँ। परंपरा: शुक्रवार को शुक्र ग्रह की शांति के लिए।